भिक्षु दर्शन कार्यशाला का सफल आयोजन

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ठाणे।

भिक्षु दर्शन कार्यशाला का सफल आयोजन

अभातेयुप द्वारा निर्देशित एवं तेयुप ठाणे द्वारा आयोजित भिक्षु दर्शन कार्यशाला तेरापंथ माजीवाड़ा मे सफ़लता से समायोजित हुई। कार्यशाला को सम्बोधित करते हुए आचार्य भिक्षु का दर्शन गहराई और ऊंचाई का समवय था उन्हें समझने के लिए चिंतन की एकाग्रता जरूरी है आचार्य भिक्षु ने मिश्र धर्म की अवधारणा को ही निराकृत कर दिया /बड़े जीवो की रक्षा के लिए छोटो की हिंसा को उन्होंने हिंसा ही माना उनके चिंतन का निष्कर्म:यही था कि हिंसा त्रिकाल में हिंसा ही मानी जायेगी।
कार्यशाला की मुख़्य वक्ता साध्वी डॉ योगक्षेम प्रभाजी ने अपने प्रखर वक्तव्य में कहा-- आचार्य भिक्षु धर्म के महान व्यख्याकार थे उन्होंने धर्म की छोटी छोटी परिभाषाओ में गहन सत्य को गुम्पित कर दिया। उन्होंने असंयम को अधर्म कहा तो असंयमी के पोषण भी अधर्म की कोटि में लिया। साध्वी लावन्यप्रभाजी ने आचार्य भिक्षु के संगठन और साध्वी कुंदन यशाजी ने उनके अनुभवो की संक्षिप्त व्यख्या की। साध्वी योगक्षेम प्रभाजी आदि सभी साध्वियों ने जम्बुद्वीप के भरत क्षेत्र में'' गीत की भावपूर्ण प्रस्तुति दी! कार्यक्रम की अध्यक्षता अभातेयुप के राष्ट्रीय सहमंत्री अंकुर लूणिया ने आचार्य भिक्षु के सिद्धांतों की संक्षिप्त प्रस्तुति दी! उन्होंने अभातेयुप के आयामो की जानकारी दी। राष्ट्रीय कार्यकारणी सदस्य निर्मल चंडालिया ने अपने भावों की प्रस्तुति दी। कार्यक्रम का शुभारंभ नमस्कार महामन्त्र के संगान से हुआ। तेयुप ठाणे के सदस्यों ने विजय गीत का संगान किया श्रावक निष्ठा पत्र का वाचन साध्वी मुदित प्रभाजी ने करवाया! तेयुप अध्यक्ष सुरेश श्रीश्रीमाल ने समस्त अतिथियो का स्वागत करते हुए साध्वी श्री के प्रति कृतज्ञता प्रकट की तेमम अध्यक्षा संगीता चंडालिया ने कार्यशाला के लिए शुभकामनाएं संप्रेषीत की! धन्यवाद ज्ञापन तेयुप के मंत्री कल्पेश टोडरवाल ने किया। सहसंयोजक के रूप में उपाध्यक्ष भाविन भंसाली ने अपनी सेवा दी। तेयुप कोषाध्यक्ष महावीर नोलखा अणुव्रत सिमिति के उपाध्यक्ष मनोहर कच्छारा की उपस्थिति रही मंच संचालन दीपेश मोटावत ने किया।