संस्थाएं
संत वह जो शीलवान और विपरीत परिस्थितियों में भी धैर्य न खोए
संत उस आत्मज्ञानी, सत्य आचरण करने वाले और सांसारिक मोह-माया से विरक्त आत्मा को कहते हैं, जिसके जीवन में सहनशीलता, करुणा और ईश्वर के प्रति निश्चल भक्ति हो। वे संप्रदाय-मुक्त होकर सभी में ईश्वर को देखते हैं, काम-क्रोध-लोभ से मुक्त होते हैं और सादगीपूर्ण जीवन जीते हुए समाज को सही मार्ग दिखाते हैं। ऐसे सभी सर्वगुणो को साक्षात मै आज अपनी आंखो से मनीषीसंत से मिलकर देख रहा हूं। ये शब्द पंचकूला से मुनि मनक कुमार जी मनीषीसंत मुनि विनयकुमारजी आलोक से मुलाकात दौरान कहे।
इस दौरान मनीषीसंत ने कहा संत वह है जो शीलवान हो और विपरीत परिस्थितियों में भी धैर्य न खोए। धन, यश और मोह-माया से दूर रहने वाले। संक्षेप में, संत वह है जो ज्ञान और भक्ति के रंग में रंगा हुआ हो और जिसका हृदय चंद्रमा की तरह शीतल हो। सावधानी भविष्य के प्रति सबसे बड़ी सावधानी तो यह रखना है कि हमारा भविष्य भूत और वर्तमान से हमेशा ऊंचा ग्राफ़ लिए हो। यानी आने वाला कल जो कि कुछ समय बाद हमारा आज बन जाएगा, इसके ग्राफ़ में हमेशा ऊंचाई हो।