रचनाएं
सूरजकंवरजी गुणवती, कर्यो स्वर्ग प्रस्थान
सूरजकंवरजी गुणवती, कर्यो स्वर्ग प्रस्थान।
धर्मसंघ में है तप्या, पायो अति सम्मान ।।
पाया वर्ष पिच्याणवें, कर्यो दीर्घ स्थिरवास।
ही विशेषतावां कई, फैली मधुर सुवास।।
सेवा, समता, सादगी और सुघड़ व्यवहार।
सद्गुण रो श्रृंगार हो, देता सब सत्कार।।
दृढ़ संकल्पी मनोबली, करता रहता त्याग,
गण-गणपति स्यूं चित्त में हो गहरो अनुराग।।
तीनू गुरवां रो मिल्यो, हरदम आशीर्वाद।
पढ़ां सुणां संदेश जद, होवै अति आह्लाद।।
सतिवर ! शिवपद थे वरो, म्हारै मन रा भाव।
भव सागर स्यू झट तरै, थारी आतम नाव।।