मानव देह पाकर धर्म का श्रवण दुर्लभ, आत्म-शुद्धि से प्रशस्त होगा मोक्ष मार्ग : आचार्यश्री महाश्रमण

गुरुवाणी/ केन्द्र

लाडनूं। 29 मार्च, 2026

मानव देह पाकर धर्म का श्रवण दुर्लभ, आत्म-शुद्धि से प्रशस्त होगा मोक्ष मार्ग : आचार्यश्री महाश्रमण

जैन श्वेताम्बर तेरापंथ धर्मसंघ के एकादशमाधिशास्ता, युगप्रधान आचार्यश्री महाश्रमणजी ने योगक्षेम वर्ष लाडनूं प्रवास के दौरान श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए मानव जीवन की दुर्लभता पर प्रकाश डाला। उन्होंने फरमाया कि चौरासी लाख जीवयोनियों के चक्र में 'संज्ञी मनुष्य' का जन्म प्राप्त करना अत्यंत कठिन है, और उससे भी दुर्लभ है—मनुष्य देह पाकर सद्धर्म का श्रवण करना।
पाप आचरण से बचें, विवेक जगाएं : आचार्यश्री ने जैन आगम उत्तरज्झयणाणि' का हवाला देते हुए फरमाया कि जिन लोगों को मनुष्य जन्म पाकर भी धर्म-अधर्म या हिंसा-अहिंसा का विवेक नहीं होता, वे इस अनमोल अवसर को पाकर भी पाप कर्मों में लिप्त हो जाते हैं। ऐसे व्यक्ति दुर्गति (नरक) के पात्र बनते हैं। पूज्य प्रवर ने फरमाया 'कल्याणकारी वाणी'सुनने से ही भीतर के भावों में शुद्धता आती है और व्यक्ति तप के मार्ग पर अग्रसर होता है।'
जीवन सुधार के लिए 'पंचशील' मंत्र : पूज्य प्रवर ने सुखी और सार्थक जीवन के लिए पांच महत्वपूर्ण सिद्धांतों पर बल दिया–
अच्छा सुनें और देखें : इससे विचारों में सात्विकता आती है।
अच्छा सोचें और बोलें : मानसिक और वाचिक शुद्धि से व्यक्तित्व
निखरता है।
अच्छा करें : कर्मों की शुद्धि ही आत्म-कल्याण का आधार है।
तप का अर्थ केवल उपवास नहीं : तपस्या की व्याख्या करते हुए गुरुदेव ने स्पष्ट किया कि केवल भूखा रहना ही तप नहीं है। आगमों में इसके बारह भेद बताए गए हैं। स्वाध्याय करना, ज्ञान को कंठस्थ करना और अपनी भूलों के लिए प्रायश्चित करना भी उत्कृष्ट कोटि की तपस्या और श्रुत आराधना है। उन्होंने सरलता (ऋजुता) को जीवन का महान गुण बताते हुए कहा कि जो व्यक्ति बालक की भांति निष्कपट होकर गुरु के समक्ष अपने दोषों को स्वीकार कर लेता है, उसकी आत्मा का मार्ग साफ हो जाता है।
विश्व शांति और अहिंसा की अपील : वैश्विक स्तर पर चल रहे युद्धों और अशांति पर आचार्यश्री ने विश्व को शांति का संदेश देते हुए फरमाया कि विपरीत परिस्थितियों और विरोधों के बीच भी समता भाव रखना अनिवार्य है। उन्होंने आचार्य तुलसी और जयाचार्य का उदाहरण देते हुए कहा कि क्रोध का त्याग कर अच्छी नीति पर चलना ही मानवता की सच्ची सेवा है।
वर्ष 2028 की बड़ी घोषणा : टोहाना (हरियाणा) के श्रावक समाज की विनती पर आचार्यश्री ने वर्ष 2028 का अक्षय तृतीया महोत्सव यथासंभव टोहाना में आयोजित करने की मंगल घोषणा की।
युवती सम्मेलन 'संगम': अखिल भारतीय तेरापंथ महिला मंडल के तत्वावधान में त्रिदिवसीय विराट युवती सम्मेलन का मंचीय कार्यक्रम संपन्न हुआ। राष्ट्रीय अध्यक्षा सुमन नाहटा ने विचार व्यक्त किए।
कठिन तप का संकल्प: मुनि नमिकुमारजी ने गुरुदेव के सानिध्य में 45 दिवसीय तपस्या का प्रत्याख्यान ग्रहण किया।
(युद्ध के शोर में गूंजा सुधर्मा सभा में अहिंसा स्वर)