AI के युग में 'कंठस्थ ज्ञान' ही साधक की असली पूंजी : आचार्यश्री महाश्रमण

गुरुवाणी/ केन्द्र

लाडनूं। 30 मार्च, 2026

AI के युग में 'कंठस्थ ज्ञान' ही साधक की असली पूंजी : आचार्यश्री महाश्रमण

जैन श्वेतांबर तेरापंथ धर्मसंघ के एकादशमाधिशास्ता, मानवता के मसीहा और युगप्रधान आचार्यश्री महाश्रमणजी ने 'उत्तरज्झयणाणि' आगम के तृतीय अध्ययन के माध्यम से श्रद्धालु जनमेदिनी को संबोधित किया। आचार्यश्री ने जीवन में 'श्रद्धा' की दुर्लभता और 'कंठस्थ ज्ञान' की महत्ता पर विशेष प्रकाश डाला।
​ज्ञान और आचरण का सेतु है श्रद्धा : आचार्यश्री ने पावन पाथेय प्रदान करते हुए फरमाया कि धर्म का श्रवण करना सरल है, किंतु सुनी हुई बात पर पूर्ण श्रद्धा का होना परम दुर्लभ है। उन्होंने कहा, 'यथार्थ सत्य जिस बुद्धि में हो, वह श्रद्धा है। ज्ञान और आचरण के बीच का सेतु श्रद्धा ही है।'जब तक मनुष्य के भीतर दर्शन मोहनीय कर्म और अनन्तानुबंधी कषाय (क्रोध, मान, माया, लोभ) का क्षय नहीं होता, तब तक सम्यक् दर्शन यानी सत्य के प्रति अभिरुचि पैदा नहीं होती। श्रद्धा वह शक्ति है जो संकट की घड़ी में भी साधक को धर्म संघ और अपने पथ पर अडिग रखती है।
​डिजिटल युग में 'कंठस्थ ज्ञान' की प्रासंगिकता : ​वर्तमान सूचना तकनीक के दौर पर चिंतन करते हुए आचार्यश्री ने फरमाया कि आज कंप्यूटर और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का युग है, जहाँ जानकारी एक क्लिक पर उपलब्ध है। किंतु, जो ज्ञान साधक के मस्तिष्क में कंठस्थ और सुरक्षित है, उसकी महिमा अद्वितीय है।
​आचार्यश्री ने एक सटीक उदाहरण देते हुए समझाया— ​'केवल किताब के भरोसे किया गया स्वाध्याय उस बूढ़े की लाठी के समान है, जो अंधेरी रात में रोशनी के बिना काम नहीं आती। जो ज्ञान कंठस्थ है, वही वैराग्य की सुरक्षा करता है और मति को निर्मल बनाता है।' 
पूर्व आचार्यों का उदाहरण और स्वाध्याय की प्रेरणा : अनुशासनिक गरिमा के साथ पूज्य प्रवर ने आचार्य श्री भिक्षु, गुरुदेव श्री तुलसी और आचार्य श्री महाप्रज्ञजी का स्मरण करते हुए बताया कि उन महान विभूतियों ने हजारों-हजार गाथाएं कंठस्थ की थीं। इसी परंपरा को आगे बढ़ाने हेतु उन्होंने समस्त चारित्रात्माओं और समणियों को 'दशवैकालिक' और 'उत्तराध्ययन' जैसे आगमों को कंठस्थ करने की विशेष प्रेरणा दी। ​प्रवचन के दौरान लाडनूं के स्थानीय श्रावक-श्राविकाओं सहित देशभर से आए श्रद्धालु उपस्थित थे। सभा का समापन मंगल पाठ के साथ हुआ।