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267वें आचार्य भिक्षु अभिनिष्क्रमण दिवस पर विविध आयोजन
267वें भिक्षु अभिनिष्क्रमण दिवस पर भिक्षु बोधि स्थल प्रांगण में जन संबोधन में मुनि प्रसन्नकुमार जी ने कहा - आचार्य भिक्षु ने अपने गुरु के साथ 18 माह तक चर्चा वार्ता कर आखिर आचार विचार पर पूर्ण सहमति नही बनने पर आज राम नवमीं के दिन बगड़ी ( पाली मारवाड़) में साधु समाज मे आचार्य शिथिलता के खिलाफ धर्म क्रांति की। तत्कालीन स्थानक वासी समाज गुरु रुगनाथ से प्रेम पूर्व अलग रास्ता अपनाया।यह तो स्वाभाविक था सत्य की क्रान्ति का विरोध होगा। साधु व समाज का संघर्ष होगा। आचार्य भिक्षु एवं उनके साथी संतो को प्रथम दिन ही ठहरने के लिए स्थान नही मिला। जैन संतो का अपना कोई मकान नही होता है। यही तो क्रांति थी,क्यों कि स्थानक मठ बना के बैठना अपना नाम का इसी के खिलाफ आवाज उठाई। आखिर प्रथम दिन की रात जैतसिंह जी ठाकुर की छतरी (श्मशान घाट) बगड़ी में ही रात बिताई। जगत जिसे अपनी मंजिल का अन्तिम स्थान समझता है,आचार्य भिक्षु उसे अपन मंजिल प्रथम स्थान बनाया। जहा सीमा समाप्त होती, आचार्य भिक्षु ने वही से प्रारम्भ किया है। श्मशानों में जनमती है क्रांति व बनता है इतिहास महान।
आज का भिक्षु अभिनिष्क्रमण दिवस राजनगर के उस समय के मुख्य श्रावकों की प्रेरणा का सुफल है। शिथिला चार के खिलाफ धर्म क्रांति सबसे पहले राजनगर के निष्ठाशील श्रावकों ने की थी। श्रावकों की प्रेरणा पाकर शास्त्रों के आधार से क्रांति की। इस अवसर पर भिक्षु बोधि स्थल के अध्यक्ष हर्षलाल जी नवलखा,अणुव्रत महासमिति के पूर्व अध्यक्ष डॉ.महेन्द्र कर्णावट, अशोक डूंगरवाल, महिला मंडल,युवती मंडल ने भी विचार रखे। मुनि प्रीतकुमार जी ने आचार्य भिक्षु के अदम्य साहस निष्ठा का उल्लेख किया। कार्यक्रम का संयोजन भिक्षु बोधि स्थल मंत्री सागरमल कावड़िया ने किया।