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267वें आचार्य भिक्षु अभिनिष्क्रमण दिवस पर विविध आयोजन
युगप्रधान आचार्य श्री महाश्रमण जी के सुशिष्य मुनि जिनेश कुमार जी ठाणा-3 के सानिध्य में 267वाँ भिक्षु अभिनिष्क्रमण दिवस कार्यक्रम जैन श्वेतांबर तेरापंथी सभा मध्य-उत्तर कोलकाता द्वारा ओसवाल भवन में आयोजित किया गया। इस अवसर पर उपस्थित धर्मसभा को संबोधित करते हुए मुनि जिनेश कुमार जी ने कहा- अठारहवी सदी के महापुरुषों में एक शक्तिशाली मेघा संपन्न आचार्य हुए है भीखण जी । वे हमारे आराध्य तेरापंथ धर्म संघ के संस्थापक थे। वे बचपन से ही नैसर्गिक प्रतिभा के धनी थे। बचपन में लोग उन्हें ज्ञानी गुरु कहते थे।
उन्होंने भरयौवन में जैन भागवती दीक्षा ली। वे आचार, विचार, संस्कार व्यवहार से संपन्न थे। साहवाचार से सजग रहते हुए गुरु सान्नधि में जैन आगमों का तलस्पर्शी अध्ययन किया। वे मनोविज्ञानी व तार्किक व दार्शनिक थे। लोगों को समझाने की अद्भूत कला थी। मुनिश्री ने आगे कहा आचार्य भिक्षु सत्य के पुजारी थे। उनका चित्त हमेशा प्रसन्न रहता था। उनका अन्तकरण करुणा से पूरित था। उनकी वाणी अमृतमयी थी, उनका जीवन परोपकार के लिए समर्पित था। उनके रोम रोम में जिनवाणी बोलती थी। उनके जीवनमें अनेक कष्ट आए उत्तार चढाव आए फिर भी हिमालय की तरह अडोल रहे। उनकी साधना निर्मल व उनका जीवन दर्शन प्रेरणास्रोत था। आचार विचार में मतभेद होने के कारण उन्होंने आज के दिन 5 संतों के साथ अभिनिष्क्रमण किया। आज रामनवमी है। भगवान राम आदर्श पुरुष थे। इस अवसर पर मुनिश्री परमानंद जी ने कहा- रामनवमी का दिन शक्ति और भक्ति के संतुलन का दिन है। आचार्य भिक्षु ने आचार-विचार को शुद्धि के लिए अभिनिष्क्रमण कर महान कार्य किया। कार्यक्रम का शुभारंभ मुनि कुणाल कुमार जी के मंगलाचरण से हुआ। इस अवसर पर महासभा के प्रधान न्यासी सुरेश गोयल व कलकत्ता सभा के अध्यक्ष अजय भंसाली ने भी अपने विचार व्यक्त किये।