नये वर्ष का अनुष्ठान व बृहद्‌ मंगल पाठ का सफल आयोजन

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उत्तर कोलकाता।

नये वर्ष का अनुष्ठान व बृहद्‌ मंगल पाठ का सफल आयोजन

युगप्रधान आचार्यश्री महाश्रमण जी के सुशिष्य मुनि जिनेश कुमार जी ठाणा 3 के सान्निध्य में नये वर्ष का अनुष्ठान व बृहद्‌ मंगल पाठ का आयोजन विनायक एनक्लेव में हुआ। इस अवसर पर मुनि जिनेश कुमारजी ने कहा इस दुनिया में नाना प्रकार की शक्तियों है। शक्ति के बिना व्यक्ति का मूल्य कम हो जाता है। शक्ति विहीन अपने आपको दयनीय व असहाय भी अनुभव करता है। शक्ति के बिना व्यक्ति पंगु के समान होता है। शक्ति के बिना भक्ति भी नहीं होती है। मन की शक्ति वचन की शक्ति, काय की शक्ति। काय की शक्ति के बिना प्रवृत्ति करने में व्यक्ति असमर्थता का अनुभव करता है। वचन की शक्ति के बिना समाज में भी अधिक मूल्य नहीं होता है। मन की शक्ति के बिना व्यक्ति सोच नहीं पाता है। शक्ति का सदुपयोग होना चाहिए।
मुनि ने आगे कहा- बाध्य शक्ति के साथ आंतरिक शक्ति का विकास जरूरी है । शक्ति के जागरण का समय है-नवरात्र नवरात्रि में नौ दैविक शक्तियों की पूजा अर्चना करते हैं। इसके साथ साथ यह‌ भी माना जाता है कि सम्पूर्ण सृष्टि की दैविक शक्तियां हमारे भीतर विद्यमान हैं । जप, तप, ध्यान, स्वाध्‌याय, अनुप्रेक्ष के द्वारा शक्ति को जागृत करें। इन दिनों में प्रकृति में भी सहज परिवर्तन घटित होता है । मुनि ने आगे कहा- आज नया वर्ष है। वि.स. 2083 प्रारंभ हो चुका है । व्यक्ति को पिछले वर्ष की लेखा जोखा करना चाहिए। नया वर्ष सबके लिए कल्याणकारी हो, मंगलकारी हो' यही शुभेच्छा करता हूँ। मुनि ने मंगलपाठ सुनाया। मुनि परमानंदजी ने कहा- हिन्दू नव वर्ष सूर्योदय के साथ प्रारंभ होता है जो प्रकाश व जागरण का प्रतीक है। मुनि कुणाल कुमार जी ने मधुर संगान सुनाया। विनायक एनक्लेव की बहिनों ने स्वागत गीत प्रस्तुत किया। मुनि परमानंद जी की संचालन किया।