रचनाएं
प्रेक्षा की निर्धूम ज्योति से ज्योतिर्मय हम बन जाएं
प्रेक्षा की निर्धूम ज्योति से ज्योतिर्मय हम बन जाएं
प्रायोगिक है जीवन प्रभु का, आदर्शों को अपनाएं।
योगक्षेम वर्ष में शिक्षण और प्रशिक्षण पाएगें
आत्मनिरीक्षण करके चेतन मन की शक्ति जगाएगे
गुरू ऊर्जा से शक्तिपात हो, केन्द्र हमारे जग जाए।।
प्रेक्षाध्यानी अनुसंधानी निज दर्शन कर पाएगें
पूरक, रेचक, कुंभक से उपशम के स्राव बहाएगे
श्वासों के रथ पर चढ़ करके ऊर्ध्वारोहण कर पाए।।
B.A, MA, CA बनकर गण नीवें गहराएंगें
कार्योत्सर्ग मंत्र प्रेक्षा से, नया सवेरा लाएंगे
ऋजुता से भावित हो तन-मन, परमानंद परम पाएं।।
दर्शनकेन्द्र णमों सिद्धाणं बाल सूर्य का perception
ज्योतिकेन्द्र संवेग नियंत्रण, कार्यों में हो perfection
(श्री तुलसी) महाप्रज्ञ अवदान शुभकंर प्रेक्षापथ पर बढ़ जाए
महाश्रमण गुरूवर क्षेमकंर पल पल करूणा बरसाए।।
प्रमुखाश्री जी का निर्देशन, हमें सफलतम करना है
मुख्यमुनि की सतत प्रेरणा गण प्रभावना करना है
साध्वीवर्या जी का चिंतन रंग नए अब भरना है।।
अग्रगामी अनुगामी के सेवा श्रम को विरूदाएं।
मुनिप्रवर आनंद निलय में अन्तर्दर्शन कर पाएं।
लय- जिसकी आज