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तेरापंथ मेरापंथ कार्यशाला का सफल आयोजन
युगप्रधान आचार्य श्री महाश्रमण जी के सुशिष्य मुनि जिनेश कुमार जी ठाणा-3 के सान्निध्य में जैन श्वेताम्बर तेरापंथी महासभा के निर्देशन में तेरापंथ: मेरापंथ कार्यशाला का आयोजन ओम स्काई लार्क के कम्युनिटी हॉल में श्री जैन श्वेताम्बर तेरापंथी सभा, उत्तर कलकत्ता द्वारा आयोजित किया गया। कार्यशाला में प्रशिक्षिका जया बोथरा थी। कार्यशाला में लगभग 60 भाई-बहिनों ने सहभागिता दर्ज कराई । कार्यशाला में प्रशिक्षण प्रदान करते हुए मुनि जिनेशकुमार जी ने कहा - तेरापंथ की पृष्ठभूमि आचार क्रांति विचार क्रांति और अनुशासन क्रांति की त्रिपदी पर अवस्थित है। आचार्य भिक्षु तेरापंथ के संस्थापक थे। उनके जीवन में अनेक उतार-चढ़ाव आए वे अभावों में जीए फिर भी वे हमेशा प्रसन्न रहें। उन्होंने तत्कालीन साधु समाज की स्थितियों को देखकर धर्म क्रांति की। वह धर्म क्रांति तेरापंथ के रूप मे विख्यात हुई। आचार्य भिक्षु महान साधक थे। उनका चिंतन हमेशा स्वस्थ और स्पष्ट था ।
तेरापंथ मेरापंथ कार्यशाला आचार्य भिक्षु के दर्शन को समझने का सुन्दर अवसर है। आचार्य भिक्ष की लौकिक लोकोतर दोन-दया की अवधारणा आदि सिद्धांतों को समझना चाहिए। मुनिश्री ने आचार्य भिक्षु के सिद्धान्तों का प्रशिक्षण प्रदान किया। कार्यशाला में प्रशिक्षिका श्रीमती जया बोथरा ने 'साध्य-साधना मीमांसा, दान और दया, प्रतिमा पूजा आदि विषयों पर विस्तार से प्रकाश डाला और प्रशिक्षण प्रदान दिया।