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मानव संस्कृति और सभ्यता के आदिकर्ता भगवान ऋषभ
जयपुर। जैन धर्म के प्रथम तीर्थंकर ऋषभ देव जी का जन्म कल्याणक और दीक्षा कल्याणक दिवस बुधवार को भिक्षु साधना केन्द्र, श्याम नगर में समारोह पूर्वक मनाया गया। कार्यक्रम में सान्निध्य प्रदान करते हुए मुनि तत्त्व रुचि जी 'तरुण' ने कहा - भगवान ऋषभ देव जी का जैन धर्म के ग्रंथों के अलावा अन्य धर्मों के ग्रंथों में भी उल्लेख मिलता है। वे मानव संस्कृति और सभ्यता के आदिकर्ता थे। उन्होंने पहले समाज व्यवस्था का सूत्रपात किया, फिर धर्म तीर्थ का प्रवर्तन किया। मुनि श्री जी ने बताया कि इस युग के प्रथम राजा, प्रथम साधु और प्रथम तीर्थंकर भगवान ऋषभ हुए। उससे पूर्व न कोई समाज, न गाँव और न कोई घर था।
लोग जंगल में रहते और कल्पवृक्ष पर आश्रित थे। "हम दो और हमारे दो" की व्यवस्था कुदरत कृत चल रही थी। बाद में प्रकृति ने मानव को नव-निर्माण के लिए बाध्य किया, तब मानवों में से एक महामानव का अवतरण हुआ। वह महामानव भगवान ऋषभ थे, जिन्होंने साधारण मनुष्य के रूप में जन्म लेकर असाधारण कार्य किये। उन्होंने प्रत्येक मानव को समूह में शांतिपूर्ण जीवन जीने की और जीवनयापन की कला सिखायी। साथ ही उन्होंने आत्मोत्थान के लिए धर्म का संदेश दिया और धर्मतीर्थ का प्रवर्तन किया। मुनि श्री संभव कुमार जी ने सुमधुर गीत के माध्यम से भगवान ऋषभ देव जी की स्तुति की। इस अवसर पर मुनि द्वय ने 'ॐ ऋषभाय नमः' मंत्र का जप भी कराया। कार्यक्रम में तेरापंथ महिला मंडल सी-स्कीम अध्यक्षा कनक आंचलिया तथा श्रावक संदीप भंडारी ने भी अपने विचार रखे।