महावीर और भिक्षु : दो युगों के दो महापुरुष, एक ही जीवन दर्शन : आचार्यश्री महाश्रमण

गुरुवाणी/ केन्द्र

लाडनूं। 31 मार्च, 2026

महावीर और भिक्षु : दो युगों के दो महापुरुष, एक ही जीवन दर्शन : आचार्यश्री महाश्रमण

जैन श्वेतांबर तेरापंथ धर्मसंघ के एकादशमाधिशास्ता, महातपस्वी आचार्यश्री महाश्रमणजी के पावन सान्निध्य में भगवान महावीर का 2625वां जन्म कल्याणक महोत्सव भव्यता के साथ मनाया गया। इस अवसर पर आचार्यश्री ने भगवान महावीर और तेरापंथ के प्रथम आचार्य, आचार्य भिक्षु के जीवन के बीच कई विस्मयकारी समानताओं को रेखांकित करते हुए मानवता को अहिंसा के मार्ग पर चलने का संदेश दिया।
महावीर और भिक्षु : एक ही तिथि, एक ही दर्शन
समारोह को संबोधित करते हुए आचार्य महाश्रमण ने कहा कि चैत्र शुक्ला त्रयोदशी का दिन जैन इतिहास में अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने बताया कि भगवान महावीर और आचार्य भिक्षु के जीवन में कई समानताएं हैं-
जन्म एवं परिवार : दोनों महापुरुषों का जन्म शुक्ला त्रयोदशी को हुआ, दोनों गृहस्थ जीवन में पाणिग्रहण संस्कार से बंधे और दोनों की एक-एक पुत्री हुई।
आदिकर व्यक्तित्व : महावीर जैन तीर्थ के प्रवर्तक थे, तो आचार्य भिक्षु तेरापंथ धर्मसंघ के आदिकर बने।
संयोग : दोनों की माताओं ने सिंह का स्वप्न देखा था और दोनों का महाप्रयाण जीवन के आठवें दशक में चातुर्मास के दौरान हुआ।
वैश्विक युद्ध संकट पर चिंता: वर्तमान वैश्विक हालातों और युद्ध की विभीषिका पर आचार्यश्री ने कहा, "आज दुनिया में हर जगह अशांति और हिंसा का माहौल है।
भगवान महावीर का अहिंसा का सिद्धांत केवल जैन समाज के लिए नहीं, बल्कि पूरी मानवता के लिए है। विकास के लिए शांति अनिवार्य है। यदि राष्ट्राध्यक्ष अहिंसात्मक चिंतन को अपनाएं, तो ही हिंसा पर विराम लग सकता है।
आध्यात्मिक उद्बोधन और प्रस्तुतियां :
कार्यक्रम का आरंभ मंगल महामंत्रोच्चार से हुआ। साध्वी वर्या संबुद्धयशाजी ने महावीर के 'आत्म कर्तृत्ववाद' की व्याख्या की, वहीं साध्वी प्रमुखा विश्रुत विभाजी ने उनके जीवन को कथनी और करनी का मूर्त रूप बताया। मुख्य मुनि महावीर कुमारजी एवं साध्वी वृंद ने गीतों के माध्यम से भावांजलि अर्पित की। इस अवसर पर आचार्य शिवमुनि जी की शिष्या साध्वी पीयूष दर्शन ने भी अपने विचार रखे।
प्रमुख घोषणाएं :
आचार्यश्री ने इस अवसर पर
घोषणा की कि वर्तमान में समणी वृंद और मुमुक्षु लाडनूं से बाहर नहीं भेजे जाएंगे।
उन्होंने श्रावकों को आहार शुद्धि पर विशेष ध्यान देने की प्रेरणा दी। कार्यक्रम में प्रवास व्यवस्था समिति के अध्यक्ष प्रमोद बैद एवं महिला मंडल ने भी अपनी सहभागिता दर्ज की।