देश विदेश में गूंजी अणुव्रत की गूंज

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जोधपुर।

देश विदेश में गूंजी अणुव्रत की गूंज

अणुव्रत लेखक मंच द्वारा आयोजित संगोष्ठी का विषय अत्यंत समसामयिक, समन्वित एवं प्रेरणादायी रहा। इस अवसर पर विभिन्न पर्वों—नव विक्रम संवत्सर, चैत्र नवरात्रि, महावीर जयंती, आचार्य श्री भिक्षु अभिनिश्रक्रमण,रामनवमी तथा ईद-उल-फितर—के माध्यम से भारतीय संस्कृति में निहित नैतिक मूल्यों, आत्मसंयम , पर्यावरण और अहिंसा के संदेश को व्यापक रूप से प्रस्तुत किया गया। कार्यक्रम का प्रारंभ अणुव्रत गीत संगान एवं अणुव्रत आचार संहिता वाचन से हुआ। अणुव्रत विश्व भारती अध्यक्ष प्रताप सिंह दूगड़ ने कार्यक्रम मे उपस्थित सभी का स्वागत करते हुए , साहित्यकारों से लेखनी के माध्यम से जन जन मे अहिंसा भावना को प्रसारित करने का अनुरोध किया। जिनेन्द्र कुमार कोठारी संयोजक अणुव्रत लेखक मंच ने मंच के उद्देश्य—मानव जीवन में नैतिकता, संयम और सद्भावना के प्रसार—को रेखांकित किया।
वक्ताओं ने अपने उद्बोधनों में विभिन्न पर्वों की आध्यात्मिक एवं सामाजिक प्रासंगिकता पर प्रकाश डाला। नव विक्रम संवत्सर को नव आरंभ, नव संकल्प और सकारात्मक परिवर्तन का प्रतीक बताते हुए कहा गया कि यह समय आत्ममंथन एवं जीवन में नई दिशा निर्धारित करने का अवसर प्रदान करता है। चैत्र नवरात्रि को आत्मशुद्धि, साधना और आंतरिक शक्ति जागरण का पर्व बताया गया, जो व्यक्ति को आत्मसंयम और अनुशासन की ओर प्रेरित करता है। महावीर जयंती के संदर्भ में भगवान महावीर के अहिंसा, अपरिग्रह और सत्य के सिद्धांतों को वर्तमान युग में अत्यंत प्रासंगिक बताया गया। उपसंहार वक्तव्य प्रभारी उपाध्यक्ष डॉ कुसुम लुनिया ने एवं आभार वक्तव्य संतोष कुमार सुराणा सह संयोजक अणुव्रत लेखक मंच ने किया।