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2625वें भगवान महावीर जन्म कल्याणक पर श्रद्धासिक्त कार्यक्रम
जैन धर्म के 24वें तीर्थंकर भगवान महावीर स्वामी का 2625वां जन्म कल्याणक (महावीर जयंती) आज विलेपार्ले में आध्यात्मिक ऊर्जा और अपार हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। यह कार्यक्रम आचार्य श्री महाश्रमण जी की विदुषी शिष्या साध्वी राकेश कुमारी जी (ठाणा-4) के पावन सानिध्य में संपन्न हुआ। कार्यक्रम की शुरुआत साध्वी राकेश कुमारी जी के मुखारविंद से नवकार मंत्र के पावन उच्चारण के साथ हुई। इसके पश्चात विलेपार्ले महिला मंडल ने मंगलाचरण प्रस्तुत कर समारोह का विधिवत शुभारंभ किया। सभा को संबोधित करते हुए साध्वी श्री राकेश कुमारी जी ने वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों पर गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा आज जब विश्व भयंकर युद्धों की विभीषिका झेल रहा है, तब भगवान महावीर का अनेकांतवाद और अहिंसा का सिद्धांत ही एकमात्र समाधान है। यदि राष्ट्र इन सिद्धांतों को अपना लें, तो वैश्विक संघर्षों पर विराम लग सकता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि महावीर को केवल पूजने से काम नहीं चलेगा, बल्कि स्वयं 'महावीर' बनकर ही उनके मर्म को समझा जा सकता है। साध्वी मलयविभा जी ने भगवान महावीर के जीवन वृत्त पर प्रकाश डालते हुए उन्हें 'करुणा का सागर' बताया। उन्होंने विस्तार से समझाया कि कैसे प्रभु के आदर्श आज के युग में भी प्रासंगिक हैं। पूर्व अध्यक्षा शशि लोढ़ा ने एक मधुर गीत के माध्यम से संपूर्ण वातावरण को भक्तिमय कर दिया।
उपासक तरुण गुंदेचा और दीपक डागलिया ने भी अपने श्रद्धासिक्त विचार व्यक्त किए। साध्वी राकेश कुमारी जी, साध्वी मलयविभा जी, साध्वी विपुलयशा जी एवं साध्वी चैतस्वी प्रभा जी की सामूहिक स्वर लहरियों ने उपस्थित जनसमूह को भक्ति रस में सराबोर कर दिया। पूरे कार्यक्रम का मंच संचालन साध्वी विपुलयशा जी ने अपनी चिरपरिचित कुशलता के साथ किया।