2625वें भगवान महावीर जन्म कल्याणक पर श्रद्धासिक्त कार्यक्रम

संस्थाएं

नरसिंहपुर

2625वें भगवान महावीर जन्म कल्याणक पर श्रद्धासिक्त कार्यक्रम

युगप्रधान आचार्य श्री महाश्रमणजी की सुशिष्या साध्वी पुण्ययशा जी के सानिध्य में भगवान महावीर की २६२५ वी जन्म जयंति नरसिंहपुर में आयोजित हुई। कार्यक्रम का शुभारंभ साध्वीश्री जी के द्वारा महामंत्रोच्चार से हुआ। साध्वी श्री जी ने अपने उद्बोधन में कहा भगवान महावीर अहिंसा के अवतारी थे, सत्य के पुजारी थे, समता के महासागर थे। वे क्षमाशूर थे, परीषहजयी थे। संसार में दो तरह के शूर होते हैं– युद्धशूर और क्षमाशूर। युद्धशूर शत्रुओं को जीतता है, क्षमाशूर शत्रुता के भाव को जीतता है, अपने आप को जीतता है। युद्धशूर दूसरों को जीतता है क्षमाशूर अपने आप को जीतता है। भगवान महावीर ने तिन्नाणं तारयाणं की साधना की। भगवान महावीर हमारे लिए आदर्श हैं। उनके सिद्धान्त बड़े प्रासंगिक है। विश्व में तीन प्रकार की समस्या है- विश्व मैत्री का अभाव, शांतिपूर्ण सहअस्तित्व का अभाव, मानवीय विषमताएं। तीनों समस्याओं का समाधान भगवान महावीर की वाणी में है। पहली समस्या का समाधान भगवान ने दिया - मित्ती में सव्वभूएसु। । दूसरी समस्या का समाधान भगवान ने दिया- अनेकान्तवाद। तीसरी समस्या का समाधान भगवान ने दिया- सब जीवों की आत्मा समान है, किसी को छोटा, बड़ा मत मानो। भगवान ने नारी को भी पुरुष के समान अधिकार दिए। हम भगवान महावीर के सिद्धांतों को समझें और अपने जीवन में उतारें। भगवान महावीर जन्म से ही मैत्री, प्रेम, करुणा के संस्कार लेकर आये थे। वे जन्म से ही शक्ति के अजस्र स्रोत थे। अहिंसक चेतना के साथ भगवान महावीर का जन्म हुआ। आज के दिन आचार्य भिक्षु की तेरस भी है। इस अवसर पर साध्वी वर्धमानयशाजीने अपने विचारों की प्रस्तुति दी। आभार ज्ञापन गौतम पीतलिया ने किया । कार्यक्रम का संचालन साध्वी बोधिप्रभा जी ने किया।