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2625वें भगवान महावीर जन्म कल्याणक पर श्रद्धासिक्त कार्यक्रम
युगप्रधान आचार्य श्री महाश्रमण जी के सुशिष्य मुनि जिनेश कुमार जी ठाणा-3 के सान्निध्य में 2625 वाँ भगवान महावीर जन्म कल्याणक महोत्सव श्री जैन श्वेताम्बर तेरापंथी सभा कोलकाता द्वारा महासभा भवन में हर्षोल्लास पूर्वक आयोजित किया गया। इस अवसर पर बृहत्तर कोलकाता के अच्छी संख्या में श्रावक-श्राविकाएँ उपस्थित थे। उपस्थित धर्मसभा को संबोधित करते हुए मुनि जिनेश कुमारजी ने कहा- भगवान महावीर भारतीय संस्कृति के दैदीप्यमान नक्षत्र थे। वे महायोगी, महात्यागी, महातपस्वी महामनस्वी महातेजस्वी महायशस्वी व महाप्रभावक थे। उनकी उज्ज्वलतम साधना सम्पूर्ण दीप्ति के साथ आज भी उद्भाषित हो रही है। वे अतीन्द्रिय चेतना के धनी थे। उनको ग्रंथों व पंथों में न खोजकर स्वयं में खोजने का प्रयत्न करे। उन्होंने आगे कहा- जो दूसरों को जीतता है वह वीर होता है और जो अपने आप को जीतता है वह महावीर होता है। भगवान महावीर का जन्म चैत्र शुक्ला त्रयोदशी को मध्यरात्रि में हुआ। उनकी माता त्रिशला व पिता सिद्धार्थ थे। उनको जीवन में लागू किया जाये ते अनेक समस्याओं का समाधान संभव है।
भगवान महावीर में मातृभक्ति, मातृप्रेम, करुणा, निरभिमानता व सहनशीलता विशिष्ट थी। उनका जीवन सभी के लिए आदर्श प्रेरणा है। महावीर जयंती के अवसर पर सभी के प्रति आध्यामिक शुभकामनाएं देता हूँ । मुनि कुणाल कुमार जी ने सुमधुर गीत का संगान किया। कार्यक्रम का शुभारंभ तेरापंथ महिला मंडल, मध्य कोलकाता के मंगलाचरण से हुआ। स्वागत भाषण श्री जैन श्वेतांबर तेरापंथी सभा, कोलकाता के अध्यक्ष अजय भंसाली ने दिया। इस अवसर जैन श्वेताम्बर तेरापंथी महासभा के प्रधान न्यासी सुरेश गोयल, तेरापंथ प्रोफेशनल फोरम कोलकाता जनरल के अध्यक्ष प्रतीक हुगड़ ने अपने विचार व्यक्त किये। आभार ज्ञापन कलकत्ता सभा के मंत्री उम्मेद जी नाहटा ने किया। कार्यक्रम का संचालन मुनि परमानंद जी ने किया।