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2625वें भगवान महावीर जन्म कल्याणक पर श्रद्धासिक्त कार्यक्रम
जैन महासभा बीकानेर द्वारा भगवान महावीर जन्मकल्याणक महोत्सव 2026 हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। कार्यक्रम में उद्बोधन देते हुए आचार्य श्री महाश्रमण के शिष्य मुनि अमृत कुमार जी ने कहा कि भगवान महावीर ने इस धरा पर जन्म लेकर आलोकित कर दिया। उन्होंने कि हमारा जैन मंत्र नवकार भी जैन एकता का प्रतीक है। हमारी सामायिक, नवकार, मंगलपाठ, तपस्या सभी एकता की प्रतीक है। बीकानेर जैन महासभा के कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि 21 व्यंजन सीमा अभियान से प्रत्येक परिवार को जुड़ना चाहिए। जैन महासभा बीकानेर के जैन समाज के लिए मुख्या, मातृत्व, पितृत्व के रूप में अपना दायित्व निभा रही है। इस अवसर पर अपने विचार व्यक्त करते हुए मुनि उपशम कुमार ने भगवान महावीर स्वामी के 27 भवों का वर्णन करते हुए कहा कि कषायों पर विजय पाना जररूरी है।। कषायों को दूर करने से ही परम लक्ष्य मोक्ष को प्राप्त किया जा सकता है। जन्म मरण के चक्कर से मुक्ति मिल सकती है।
आचार्य श्री महाश्रमण जी की शिष्या साध्वी रश्मि प्रभाजी ने आत्मा भिन्न है शरीर भिन्न है कि एक माला जपते हुए ध्यान के द्वारा अनुभव करने की प्रेरणा देते हुए कहा कि ऐसा एक वर्ष लगातार करने से आप अपने आप में हुवे परिवर्तन को स्वयं अनुभव कर सकते हैं। साध्वी श्री जी ने गीतिका के माध्यम से भगवान महावीर के गुणों का गुणगान किया। आचार्य श्री महाश्रमण जी की शिष्या साध्वी कल्पयशा जी ने कहा कि भगवान का जन्म दिन अहिंसा, करूणा ओर मैत्री का जन्म दिन है। भगवान महावीर को एक दिन नही प्रति दिन याद रखे। उन्हें भुले नही। उनके बताऐं मार्ग पर चले। समाज में ओर अधिक एकता बढे। तपागच्छ से अमित गुणाश्री जी ने गीतिका का संगान किया। तथा भगवान के पांच कल्याणक के बारे में बताया। तपागच्छ से साध्वी अर्चित गुणा श्री जी ने कहा की कषाय दूर हो जाने से कैवल्य ज्ञान होता है। कार्यक्रम में जैन महासभा के अध्यक्ष कन्हैयालाल बोथरा ने सभी का स्वागत किया।मुख्य अतिथि गौरव बोथरा IAS, का परिचय महासभा के सह मंत्री मनीष नाहटा ने दिया। मुख्य अतिथि गौरव जी भगवान महावीर के अनेकान्तवाद दर्शन को विश्व की समस्त समस्याओं के हल का रास्ता बताया। आभार ज्ञापन महासभा के उपाध्यक्ष संजय सांड ने किया। कार्यक्रम का सफल संचालन महासभा के महामंत्री जैन जतनलाल संचेती ने किया।