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आदिपुरुष भगवान ऋषभनाथ : तीन सूत्रों ने गढ़ा आधुनिक भारत
भारत केवल एक देश नहीं, एक संस्कृति की सतत यात्रा है। यह यात्रा यूँ ही आगे नहीं बढ़ी, इसके पीछे कुछ ऐसे मूल सूत्र हैं, जिन्होंने मानव जीवन को दिशा, दशा और दृष्टि दी। जैन परंपरा कहती है, जब मानव जीवन अनगढ़ था, तब आदि पुरुष भगवान ऋषभनाथ ने उसे आकार दिया। उन्होंने केवल धर्म नहीं सिखाया, बल्कि जीवन जीने की कला सिखाई। असि, मसि और कृषि, ये तीन शब्द नहीं, बल्कि सभ्यता के तीन स्तंभ हैं। और यदि गहराई से देखें, तो आज का विकसित भारत, उस पहली शिक्षा का ही विस्तृत रूप है।
1. “कृषि” : आत्मनिर्भर भारत की जड़
भगवान ऋषभनाथ ने जब “कृषि” सिखाई, तब उन्होंने केवल अन्न उगाना नहीं सिखाया, उन्होंने सिखाया आत्मनिर्भर होना। आज वही भावना हमें दिखती है—
स्टार्टअप इंडिया में युवा अपने “बीज” बो रहे हैं।
●ग्रामीण उद्यमिता गाँवों को सशक्त बना रही है।
●ऑर्गेनिक फार्मिंग प्रकृति के साथ संतुलन बना रही है।
कृषि का असली अर्थ है निर्भरता से स्वतंत्रता की ओर बढ़ना। यही कारण है कि भारत आज विश्व में आत्मनिर्भरता की ओर मजबूती से बढ़ रहा है।
2. “मसि” : ज्ञान से महानता तक
“मसि” यानी लेखन, ज्ञान, अभिव्यक्ति। भगवान ऋषभनाथ ने मानव को सोचने और सीखने की शक्ति दी। आज उसी “मसि” का आधुनिक रूप है—
डिजिटल इंडिया : ज्ञान हर हाथ में
नई शिक्षा नीति (NEP) : कौशल और संस्कार
इनोवेशन और रिसर्च : भारत वैश्विक मंच पर
लेकिन यहाँ एक गहराई छिपी है, ज्ञान केवल जानकारी नहीं, चरित्र निर्माण का साधन है। यही “मसि” भारत को बुद्धि से महान बना रही है।
3. “असि” : शक्ति नहीं, संरचना का आधार
“असि” का अर्थ केवल शस्त्र नहीं, बल्कि व्यवस्था और सुरक्षा है। भगवान ऋषभनाथ ने सिखाया समाज को सुरक्षित और संगठित कैसे रखा जाए। आज यह रूप ले चुका है: मजबूत प्रशासन और व्यवस्था, अनुशासित सुरक्षा तंत्र, जिम्मेदार नेतृत्व और गवर्नेंस; पर उनका मूल संदेश आज भी उतना ही प्रासंगिक है, शक्ति का उद्देश्य संरक्षण हो, प्रदर्शन नहीं।
यदि हम तीनों को जोड़ें, कृषि (आत्मनिर्भरता), मसि (ज्ञान), असि (व्यवस्था) तो बनता है एक संतुलित और उन्नत राष्ट्र। आज भारत तकनीक में आगे है, अर्थव्यवस्था में बढ़ रहा है, पर उसकी असली ताकत है—उसकी जड़ें। आदिपुरुष भगवान आदिनाथ का संदेश हमें याद दिलाता है “विकास तभी स्थायी है, जब उसमें मूल्य जुड़े हों।”
भगवान ऋषभनाथ ने जो बीज बोए थे, आज वही वटवृक्ष बनकर भारत को छाया दे रहे हैं।
हर स्टार्टअप में “कृषि” की आत्मनिर्भरता है
●हर स्कूल में “मसि” की चेतना है
●हर व्यवस्था में “असि” का संतुलन है
और यही कारण है कि भारत केवल आगे नहीं बढ़ रहा, बल्कि सही दिशा में बढ़ रहा है। आज हमें कुछ नया खोजने की जरूरत नहीं है, बस पुराने मूल्यों को नए रूप में जीने की जरूरत है। आदि पुरुष ऋषभनाथ का संदेश आज भी उतना ही स्पष्ट है “जो जड़ों से जुड़ा है, वही ऊँचाइयों को छूता है।”