रचनाएं
शिव ऋषभ एक व्यक्ति
आई आखा तीज महान, धरें हम ऋषभ प्रभु का ध्यान।
मन, वच, काया कर प्रणिधान।।
अद्भुत यह तिथि अक्षय है, देखे शुभ मुहूरत मय है।
सबके कार्य बनें फलवान।।
चाहे लौकिक लोकोतर, महिमा जग में उत्तरोत्तर।
सत शिव सुंदर की पहचान।।
प्रभु ने संयम स्वीकार, प्रकटी तप की शुभ धारा।
करने आत्मा का कल्याण।।
शिव ऋषभ एक व्यक्ति हैं, दो धारा इक शक्ति है।
इसका है इतिहास प्रमाण।।
जो पुण्यश्लोक आत्माएं, तप से निज कर्म खपाएं।
बनें सब संत मुकुल भगवान।।
लय- हमारे भाग्य बड़े….