जय-जय मरुदेवा नन्दन

रचनाएं

नचिकेता मुनि आदित्य कुमार

जय-जय मरुदेवा नन्दन

जय-जय मरुदेवा नंदन, झुक झुक के करते है वंदन।
उत्थान करो भक्तों का जिनवर, आदिम बाबा।।
हर घर के आगे जा रुकते, भक्त भावना भाते हैं,
हीरे, पन्ने, माणक, मोती, रत्न सामने लाते हैं ।
भिक्षा विधि का ज्ञान नहीं, देने की पहचान नहीं।।
उत्थान करो.....
श्री श्रेयांसकुमार पौत्र था, निद्रा में आया सपना,
मैं मेरु को सींच रहा हूं, भाग्य मानता है अपना ।
प्रातः द्वार प्रभु आए, दर्शन कर मन हरसाए ।।
उत्थान करो.....
प्रासुक इक्षुरस प्रांगण में कृपा कराओ हे स्वामी,
कर्म निर्जरा का अवसर दो, आदिनाथ अन्तर्यामी।
इक्षु रस फिर बहराया, देवों ने मंगल गाया।।
उत्थान करो.....
दिव्य दिवस अक्षय तृतीया का, मिलजुल आज मनाएं हम,
कर वर्षीतप प्रभु के पथ पर अपने कदम बढ़ाएं हम।
तेरापंथ हमें प्यारा, महाश्रमण का बरतारा।।
उत्थान करो.....
लय - मेहंदी रची थारे हाथां में…