रचनाएं
जीवन कथा सुनाते हैं
प्रथम जिनेश्वर आप्त पुरुष की जीवन कथा सुनाते हैं
अक्षयतीज पावन पर्व गौरव गाथा गाते हैं
जय जय ऋषभ प्रभो ॥ध्रुव ॥
भरत क्षेत्र में विनितानगरी जिसकी स्वगोंपम उपमा
इक्ष्वाकु कुल नाभि राजा, महारानी मरुदेवा मां
कुल में लिया अवतार जिसका नाम ऋषभ नन्दन प्यारा
दिग्दिगन्त में बांटे खुशियां बहती आनन्द की धारा
जन्माभिषेक पर हर्षोल्लास मनाने सुरगण आते है ॥1॥
सामाजिक प्रथा चलाई, सुमंगला सुनन्दा शादी कर
किया मानव का उत्थान, लौकिक कलाएं सिखलाकर
अनन्त उपकार किया विश्व का वो महामानव अवतारी
भरत बाहुबल सौ पुत्र अरु. दो पुत्रियां ब्राह्मी सुन्दरी
अध्यात्मपथ पर अभिनिएक्रमण आगे कदम बढ़ाते है ॥2॥
भारत भू पर बिचरण बिचरत नगरी गजपुर (हस्तिनापुर) पधराये
बैलों के छिंकी बांधी वो अन्तराय कर्म उदय आये
घर-घर घूम रहे भिक्षा हित जन भिक्षा विधि नहीं जानते
हीरा पन्ना माणक मौती थाल भर भर कर लाते
मौनी बाबा नहीं लेते है आगे चरण बढ़ाते है ॥3॥
राज भवन में सपना देखा, श्रेयांस पौता सौभागी
मेरुपर्वत को मैं सींचू, तकदीर मेरी है जागी
इक्षुरस से हुआ पारणा, वो अक्षय तीज अमर हुई
पंचदिव्य रत्नों की वृष्टि, फूलों की बरसात हुई
ब्रह्माण्ड में (तीन लोक) आलोक फैला, दुन्दुभि देव बजाते है ॥4॥
वर्षीतप की स्वस्थ परम्परा सुनलो अमर कहानी है
हजारों तपसी तपस्या करते, वर्षीतप की निशानी है
वर्षीतप करने वालों को सौ-सौ साधुवाद है
महातपस्वी महाश्रमण का मिलता आशीर्वाद है
ऋषभनाथ के यशोगीत का तप परचम फहराते हैं ॥.5॥
दीक्षा लेकर कर्मकाटकर केवलज्ञान का वरण किया
दिव्य संदेशों उपदेशों से, जनता का कल्याण किया
ऋषभनाथ का जाप जपो ॐ ऋषभाय नमः मंगलकारी
महाउपकारी ऋषभ प्रभु की जाती 'राकेश' बलिहारी
प्रथम तीर्थंकर ऋषभप्रभु को श्रद्धा सुमन चढ़ाते है। ॥6॥
तर्ज – आओ बच्चों तुम्हे....