कैसे उत्कृष्ट वर्षीतप करे!

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मुनि ज्ञानेन्द्र कुमार

कैसे उत्कृष्ट वर्षीतप करे!

अक्षय तृतीया एक महान पर्व है यह पर्व तप एवं त्याग के साथ जुड़ा हुआ है। भगवान ऋषभ देव ने इस दिन उनकी तपस्या का इक्षु रस से पारणा किया। इसलिए इसको अक्षय तृतीया कहा जाता है। प्रतीकात्मक रूप से तेरह महीने के एकान्तर तप कर के मनाते हैं। बहुत सारे लोग इस तप को करते हैं किन्तु सभी इस तप को तो नही कर सकते है। भगवान ऋषभदेव ने यह तप 400 दिन का निर्जल निराहार तप किया था परन्तु आज वह शारीरिक शक्ति नही है, इसलिए आज प्रतीकात्मक रूप से एक दिन उपवास और एक दिन पारणा करते हैं। यह तो तपस्या के रूप में है परन्तु इसे नये तरीके से भी किया जाए तो यह नया वर्षीतप नये रुप में होगा। एक वर्ष तकरीबन क्रोध विजय का वर्षीतप करें, एक वर्ष तक नये वस्त्र खरीदने का त्याग कर के किया जाए, एक वर्ष प्रतिदिन एक घंटे स्वाध्याय करके किया जाए–स्वाध्याय भी आगम का किया जाए, एक वर्ष में प्रतिदिन 54 लोग्गस का ध्यान करके किया जाए, एक वर्ष प्रतिदिन आधा घंटा ध्यान दीर्घ श्वास प्रेक्षा के अभ्यास के साथ किया जाए और ऐसे अनेक प्रकार है जो वर्षीतप तपस्या के रूप में किया जा सकता है। आगम तप अथवा निर्जरा के बारह भेद बतायें गए हैं किसी भी एक भेद की साधना करके आत्म विशुद्धी के पथ पर चरण न्यास किया जा सकता है। भगवान ने कर्म निर्जरा के द्वारा आत्मा को भावित करने का उपाय बताया है। वर्षीतप की साधना करने वाले तों कठिन साधना करते ही है परन्तु क्रोध विजय आदि अन्य प्रकार की साधना करके भी आत्मा को भावित किया जा सकता है।