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अखिल भारतीय तेरापंथ महिला मंडल के 'संगम' कार्यकम का विशिष्ट आयोजन
परम पूज्य गुरुदेव आचार्य श्री महाश्रमण जी के आशीर्वचन एवं मंगल पाठ का श्रवण कर अखिल भारतीय तेरापंथ महिला मंडल की टीम ने त्रिदिवसीय विराट युवती सम्मेलन – ‘संगम’ का भव्य शुभारंभ किया। देश-विदेश से आई लगभग 1000 युवती बहनें उत्साह, उमंग एवं समर्पण के भाव के साथ इस सम्मेलन में सहभागी बनी जिससे पूरे आयोजन ऊर्जावान और प्रेरणादायी बन गया।
प्रथम दिवस : भक्ति और प्रतिभा का सुंदर समन्वय
परिचय सत्र का शुभारंभ जयपुर सी-स्कीम युवती विभाग द्वारा मंगलाचरण से हुआ, जिससे समूचा वातावरण भिक्षुमय बन गया। इसके पश्चात युवती बहनों ने आचार्य भिक्षु के प्रति श्रद्धा अर्पित करते हुए गीतिकाओं के माध्यम से प्रभावशाली प्रस्तुतियां दी। राष्ट्रीय अध्यक्ष सुमन नाहटा ने अपने प्रेरक उद्बोधन में युवतियों को महिला मंडल से जुड़कर सक्रिय भूमिका निभाने और समाज निर्माण में योगदान देने के लिए प्रेरित किया। साथ ही ‘नारीलोक’ पत्रिका के अंतर्गत विभिन्न गतिविधियों की विजेता बहनों को प्रमाण पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया।
द्वितीय दिवस : प्रेरणा, ज्ञान और अभिव्यक्ति का उत्कर्ष
विविध प्रेरणादायी एवं ज्ञानवर्धक सत्रों से परिपूर्ण रहा। उद्घाटन सत्र में मुख्य वक्ता RJ कार्तिक ने “FAMILY” सूत्र—Forgiveness, Acceptance, Mutual Respect, Inspiration, Love, You—के माध्यम से युवतियों को जीवन मूल्यों की सुंदर दिशा दी। इसके पश्चात आयोजित सत्र में 9 साध्वी प्रमुखाओं की आध्यात्मिक जीवन यात्राओं की भावपूर्ण प्रस्तुतियों ने पूरे परिसर को “ॐ अर्हम” की पावन ध्वनि से गुंजायमान कर दिया। विशेष आकर्षण रहा गुरुदेव इंगित पंच परमेष्ठी गीतिकाओं पर आधारित क्विज़ प्रतियोगिता, जिसमें 66 प्रतिभागी युवतियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और ज्ञान का उत्कृष्ट प्रदर्शन किया। द्वितीय दिवस के अंतिम सत्र में विभिन्न क्षेत्रों की युवतियों ने सामाजिक विषयों—जैसे सोशल मीडिया का प्रभाव, पारिवारिक मूल्यों, जैन जीवन शैली, संस्कृति संरक्षण एवं आधुनिकता—पर अत्यंत प्रभावशाली प्रस्तुतियाँ दीं, जिसने सभी को चिंतन हेतु प्रेरित किया।
तृतीय दिवस : अनुशासन, ऊर्जा और आध्यात्मिक उत्कर्ष का दृश्य
तृतीय दिवस पर विशाल रैली का आयोजन किया गया, जिसमें भारत एवं नेपाल के 22 राज्यों से आई युवतियों ने अनुशासन और उत्साह के साथ भाग लिया। “जय-जय ज्योतिचरण, जय जय महाश्रमण” एवं “लिखें शक्ति की नई ऋचाएँ, अनुशासन के दीप जलायें” जैसे उद्घोषों से पूरा परिसर ऊर्जा से भर उठा। सम्मेलन का भव्य समापन परमपूज्य आचार्य श्री महाश्रमण जी के पावन सान्निध्य में हुआ। 108 युवतियों द्वारा पंच परमेष्ठी गीतिकाओं की सामूहिक प्रस्तुति ने आध्यात्मिक वातावरण को और भी दिव्य बना दिया। अपने मंगल पाथेय में आचार्य प्रवर ने युवतियों को पारिवारिक, सामाजिक, धार्मिक एवं आत्मिक—चारों आयामों में संतुलित विकास का संदेश दिया। साध्वीप्रमुखा श्री विश्रुतविभा जी ने आधुनिकता के साथ आध्यात्मिकता के समन्वय पर बल देते हुए “क्वालिटी ऑफ लाइफ” को प्राथमिकता देने की प्रेरणा दी। साध्वीवर्या श्री संबुद्धयशा जी ने सद्गुणों के विकास और सकारात्मक जीवनशैली अपनाने का संदेश प्रदान किया। इस अवसर पर युवती विभाग की गतिविधियों पर आधारित एक प्रेरणादायी डॉक्यूमेंट्री भी प्रस्तुत की गई। राष्ट्रीय अध्यक्ष सुमन नाहटा ने सम्मेलन की रूपरेखा एवं गतिविधियों का निवेदन प्रस्तुत किया तथा महामंत्री रचना हिरण ने सभी के प्रति कृतज्ञता ज्ञापित की।