शुभ आया दिन आया

रचनाएं

साध्वी शुभ्रयशा

शुभ आया दिन आया

शुभ आया दिन आया, भोर सुहानी लाया
खुशियां अपरम्पार, गण में छाई बहार...
तप से भी, जप से भी, ध्यान स्वाध्याय से भी
विमल विचार जलधार, गण में छाई बहार...
सफल संरचना आर्य देव की, सबके मन भाई
चिन्तन निर्णय कार्यप्रणाली, गुरुता गहराई
मनोनयन का दृश्य अनूठा, बगियां सरसाई
आर्यचरण में अविरल बहती करुणा कल्याणी
गुरु रिछपाल करें, सबको निहाल करें, सपने हुए साकार ॥
शौर्य भरा कर्तृत्व तुम्हारा, श्रम की सहनाणी (निशानी)
नीति निपुण नेतृत्व निराला, गण हित कुर्बानी
पूर्व जन्म की साधिका हो, महाप्रज्ञ वाणी
श्रुत राशि का अमृत प्याला, सींचो फुलवारी
सहज समर्पण, गुरुभक्ति दर्पण, महके गण मन्दार ॥
कब कैसे कितना कहना है, पूरा ध्यान धरे
शांत भाव से समय-समय पर अनुशासन भी करे
तन रोगी भी, मन रोगी भी चित्त समाधि वरे
संग रहे माता के हरदम, अनुभव खरे
उज्ज्वल मोती, जगमग ज्योति, श्रमणी गण श्रृंगार ॥
गुरु हृदय ने यह रूप सँवारा, लगता मनहार
महाश्रमण युग में शोभित है, पद प्रमुख प्यारा
है अनन्त उपकार प्रभु का, बदली युग धारा
निज दीक्षोत्सव पर है उत्सव, प्रणत है गण सारा
समदर्शन तेरा, युग दर्शन तेरा, युगनायक जयकार ॥
योगक्षेम वर्ष में अभिनव चयन दिवस सुखकर
हर दिन तुमसे मिलता शिक्षण है कितना हितकर
कुशल व्यवस्था तंत्र तुम्हारा, सुरभित गण सरवर
आत्मलीन साध्वीगण तेरा, अनुशासित परिकर
सुन्दर है शैली तेरी, कितनी अलबेली तेरी, महिमा का नहीं पार॥