ये नए चाँद की नई चाँदनी

रचनाएं

साध्वी उज्ज्वलरेखा

ये नए चाँद की नई चाँदनी

ये नए चाँद की नई चाँदनी, धरती पर छिटकाई है।
नखत सितारे तान सुनाते, गण की आब बढ़ाई है ॥
आओ गाओ, आओ गाओ...।
उजले पल उजली दिशाएं, श्रद्धा की सरगम गाएं।
मनोनयन यह महासती का, अभिनन्दन कर हर्षाएं।
स्वीकारो सौ-सौ वंदनाएं, शुभ दिन शुभ घड़ी आई है ॥
नखत सितारे...
सतरंगी अरुणाभ सन्निधि, सतरंगी खुशियां लाई।
पंचम स्वर कोयलियां चहकें, हरकणी ये मन भाई।
मंगल गाएं आज बधाई, सतरंगी सुषमा छाई ॥
नखत सितारे...
ज्ञानयोग से भक्तियोग और दुर्लभ कर्मयोग संगम।
पाप-ताप-संताप हरे, निर्मल पावन तीर्थ जंगम।
तेरे तपोयोग की गाथा, 'गणवन' में महकाई है ॥
नखत सितारे...
बह्म बेला स्वाध्याय बांसुरी, करती पीयूष रस वर्षण।
अद्भुत अनुशासन कौशल है, जागरूक पल-पल जीवन।
विनय समर्पण श्रमनिष्ठा से, हरपल दीपित पुण्याई है ॥
नखत सितारे...
तर्ज – है प्रीत जहाँ की रीत सदा