खुशियों का मौसम  आया, मंगल गाएँ

रचनाएं

साध्वी प्रेक्षाप्रभा

खुशियों का मौसम आया, मंगल गाएँ

खुशियों का मौसम आया, मंगल गाएँ।
श्रमणीवृंद को मिलजुलकर, आज बढ़ाएँ ॥
श्रद्धा के सुमनों से, भाव सजाएँ।
श्रमणीवृंद को, मिलजुलकर आज बढ़ाएँ ॥
सविता से स्मित प्रज्ञा की विशद कहानी।
विश्रुतविभाजी, साध्वी प्रमुखा सुहानी।
नमन श्री चरणों में, चयन दिन मनाएँ ॥
शरद पूर्णिमा जैसी, उज्ज्वल साधना।
स्वाध्याय रोशनी से, प्रभु पथ आराधना।
साँसों की सरगम तेरी, गाएँ बजाएँ ॥
श्री महाप्रज्ञ सन्निधि, बनी वरदायी।
महातपस्वी की शुभ दृष्टि सवाई।
खुशहाली छायी गण में, नयन मुस्काएँ ॥
ऊर्जा का निर्झर पावन, करुणा का आलम।
तनुरत्न रहे हरदम, तेरा निरामय।
सपने साकार हों सब, कदम बढ़ाएँ ॥
लय: तुम्ही मेरे मंदिर