रचनाएं
भंते! भागां स्यूं पायो शासन, दीपै है ओ सिंहासन
भंते! भागां स्यूं पायो शासन, दीपै है ओ सिंहासन,
चरणां में श्रद्धारो उपहार है।
हो भंते! सिंचन दो ये कलियां तैयार हैं।।
भैक्षव गण नंदनवन पायो, भाग है ओ मारो,
महाप्रज्ञ रा पट्टधर दीपो, जिनवर सो है बरतारो।
भावी पीढ़ी ने खूब निखारो, अपने हाथां स्यूं संवारो,
था स्यूं ही गण बगिया गुलजार है।।
नेमा मां की कुक्षी स्यूं अवतार लियो सरदारशहर में,
मंत्री प्रवर स्यूं संयम पायो, जन्मभूमि प्रांगण में।
दुगड़ कुल ने थे दीपायो, रजधानी रो नाम कमायो,
गाथा गावै नर-नार है।।
महाप्रज्ञ री करुणा स्यूं, शासन ने शिखर चढ़ायो,
प्रभु निरामय बनो चिरामय, यात्रा कर सुयश बढ़ायो।
शासन ने खूब दीपावो, शासन को भाग्य सवायो,
चैतन्य को महाश्रमण आधार है।
जन्मोत्सव पट्टोत्सव दीक्षा दिवस आज मनाएं,
शासन के मुकुटमणि को, हम सब आज बधाएं।
गुरुवर पावां सन्निधि रो वर, हुलसावां जन्म-जन्मभर,
अभिवंदन करते शत-शत बार है।।
(लय: संता शासन ओ स्वामीजी रो...)