रचनाएं
उजली संयम री किरणां
उजली संयम री किरणां, मन मोहनी लागे २
थांरी साधना री लौ, जग में राचै २
महावीर सो रूप थांरो, महावीर सो जीवन।
महावीर सी साधना कर, चमकायो नन्दनवन।
थांरै अन्तर जग रो हो... रूप निरालो लागे २
एक एक तार ज्ञान रो, खोल खोल निहार्यो।
एक एक बिन्दु पर चंचल, मन घोड़े ने वार्यो।
थांरी देशना में हो... वीर सी आवाज गाजे २
थांरी साधना री लौ, जग में राचै २
योगी महायोगी थांरै, चरणां में शीश झुकावै २
देव दानव मानव स्वर्गां में सम्मान बढ़ावै।
भारत माता हो... थांने,
बार-बार थुथकारो (जुहारो) बोले ॥
थांरी साधना री लौ, जग में राचै ॥
इक्कीसवीं सदी में, नवयुग रो निर्माण कर्यो।
अहिंसा यात्रा कर लाखां-लाखां रो, क्लेश हर्यो।
जिनशासन में नाम थांरो, भृगासर (श्रृंगार) लागे २
थांरी साधना री लौ, जग में राचै ॥
लय: मीठै रस स्युं भरियोड़ी