इंद्रियाँ हैं साधना का माध्यम, इनकी सक्षमता पर ध्यान देना हर साधक का दायित्व : आचार्यश्री महाश्रमण

गुरुवाणी/ केन्द्र

लाडनूं। 05 मई, 2026

इंद्रियाँ हैं साधना का माध्यम, इनकी सक्षमता पर ध्यान देना हर साधक का दायित्व : आचार्यश्री महाश्रमण

जैन श्वेताम्बर तेरापंथ धर्मसंघ के एकादशमाधिशास्ता, तीर्थंकर के प्रतिनिधि आचार्यश्री महाश्रमण जी ने आज ‘इंद्रिय बलहीनता’ के महत्वपूर्ण विषय पर पावन पाथेय प्रदान किया। आचार्यश्री ने जीवन के उत्तरार्ध में होने वाली शारीरिक और इंद्रिय शिथिलता के प्रति सचेत करते हुए उनके संयमित उपयोग का मार्ग दिखाया।
इंद्रियाँ: विकास और शक्ति का पैमाना:
आचार्य प्रवर ने फरमाया कि मानव शरीर में पाँच इंद्रियाँ होती हैं, जो चेतना के विकास की द्योतक हैं। इंद्रियों के विभिन्न क्रमों का विश्लेषण करते हुए पूज्य प्रवर ने बताया कि चक्षु (आंख) को प्रधानता देने का एक कारण यह भी है कि इंद्रिय शक्ति की हीनता बहुलांशतया सबसे पहले आंखों पर ही आती है। भगवान ने गौतम के माध्यम से संदेश दिया है कि अवस्था बढ़ने पर शरीर के साथ-साथ इंद्रिय बल, मनोबल और प्राणशक्ति में दुर्बलता आना स्वाभाविक है।
साधना के लिए इंद्रिय सुरक्षा आवश्यक:
चारित्रात्माओं को प्रेरणा प्रदान करते हुए आचार्यश्री ने इंद्रियों की सुरक्षा और सदुपयोग पर विशेष बल दिया।
पूज्य प्रवर ने व्यावहारिक निर्देश देते हुए कहा कि: १. पढ़ने-लिखने का कार्य यथासंभव अच्छी रोशनी में ही करें।
२. रात्रि के समय आंखों पर अधिक दबाव न डालते हुए कंठस्थ ज्ञान को चितारने (पुनरावृत्ति) का प्रयास करें।
३. रात्रि बेला में जप और ध्यान के प्रयोगों को प्राथमिकता दें।
गुरुदेव ने स्पष्ट किया कि धर्म कार्यों को दीर्घकाल तक कुशलतापूर्वक करने के लिए इंद्रियों की सक्षमता बनाए रखना अनिवार्य है।
जिज्ञासा समाधान एवं भावाभिव्यक्ति:
मंगल प्रवचन के उपरांत आचार्य प्रवर ने चारित्रात्माओं की विविध जिज्ञासाओं को सुना और उनका तात्विक समाधान किया। गुरुदेव के जन्मोत्सव, पट्टोत्सव और दीक्षा दिवस के उपलक्ष्य में वर्धापना का क्रम आज भी उत्साहपूर्वक जारी रहा, जिसमें संतों और साध्वियों ने अपनी भावपूर्ण प्रस्तुतियां अर्पित कीं।
विशिष्ट जनों की उपस्थिति : राष्ट्रीय सेवा योजना (NSS) के राज्य संपर्क अधिकारी डॉ. नरेन्द्र गुप्ता ने आज गुरुदेव के चरणों में अपनी विनयांजलि अर्पित की। उन्होंने अपनी भावनाओं की अभिव्यक्ति करते हुए शांतिदूत से मंगल आशीर्वाद प्राप्त किया।