धर्म रूपी जलाशय और ब्रह्मचर्य तीर्थ ही ऋषियों का वास्तविक महास्नान : आचार्यश्री महाश्रमण

गुरुवाणी/ केन्द्र

लाडनूं। 03 मई, 2026

धर्म रूपी जलाशय और ब्रह्मचर्य तीर्थ ही ऋषियों का वास्तविक महास्नान : आचार्यश्री महाश्रमण

जैन श्वेताम्बर तेरापंथ धर्मसंघ के एकादशमाधिशास्ता, अहिंसा यात्रा प्रणेता, महातपस्वी आचार्य श्री महाश्रमण जी ने आज ‘महास्नान ऋषियों का’ विषय पर मार्मिक तात्विक विवेचन प्रस्तुत किया। आचार्यश्री ने एक संवाद के माध्यम से स्पष्ट किया कि शरीर की बाहरी स्वच्छता से कहीं अधिक महत्वपूर्ण आत्मा की आंतरिक शुद्धि है।
धर्म का जलाशय और प्रसन्न लेश्या:
एक मुनि और जिज्ञासु के संवाद का उदाहरण देते हुए आचार्य प्रवर ने फरमाया कि ऋषियों का जलाशय 'धर्म' है, जहाँ प्रसन्न (निर्मल) लेश्या का वास होता है। जैसे स्वच्छ आकाश को प्रसन्न कहा जाता है, वैसे ही धर्म रूपी निर्मल जल में स्नान कर ऋषि अपने कर्म-रजों को धोते हैं। ब्रह्मचर्य को 'शांति तीर्थ' बताते हुए पूज्य प्रवर ने फरमाया कि इस आध्यात्मिक स्नान से ही आत्मा विमल और विशुद्ध बनती है।
आत्मा की नदी और संयम का जल :
शास्त्रों के श्लोक का उद्धरण देते हुए आचार्यश्री ने समझाया कि हमारी आत्मा एक नदी के समान है। यदि इसमें संयम रूपी पुण्य जल हो, सत्य का प्रवाह हो, दया की लहरें हों और शील का सुदृढ़ तट हो, तो ऐसी नदी में स्नान करने से आत्मा का कल्याण सुनिश्चित है। बाहरी पानी से होने वाला स्नान केवल शरीर को स्वच्छ कर सकता है, किन्तु भीतर के पाप केवल संयम रूपी जल से ही धुल सकते हैं।
प्रतिक्रमण : आत्म-शुद्धि का दैनिक स्नान : साधु जीवन में प्रतिक्रमण की महत्ता बताते हुए आचार्यश्री ने फरमाया कि प्रतिक्रमण भी एक प्रकार का स्नान ही है। यद्यपि लक्ष्य यह होना चाहिए कि दोष लगे ही नहीं, फिर भी यदि प्रमादवश कोई अतिचार लग जाए, तो सुबह-शाम प्रतिक्रमण के माध्यम से आत्म-सफाई कर लेनी चाहिए। उन्होंने गृहस्थों को भी पर्युषण आदि अवसरों पर प्रतिक्रमण के जरिए इस धर्म-जलाशय में स्नान करने की प्रेरणा दी।
शिविरार्थियों को उपसंपदा एवं अभिवंदना : आचार्य प्रवर ने प्रेक्षाध्यान शिविर के प्रतिभागियों को विधिवत 'उपसंपदा' प्रदान कराई। कार्यक्रम में मुनि मर्यादा कुमार जी एवं मुनि मेघ कुमार जी ने अपनी भावाभिव्यक्ति दी। साध्वी चेतनयशा जी, साध्वी मेरूप्रभा जी सहित अनेक साध्वी व समणी वृन्द ने प्रस्तुतियाँ दीं।
इस अवसर पर भीलवाड़ा के सांसद दामोदर अग्रवाल ने भी पूज्यवर के जन्मोत्सव एवं पट्टोत्सव पर अपनी विनयांजलि अर्पित की और आचार्यश्री से मंगल आशीर्वाद प्राप्त किया।