दक्षिणांचल स्तरीय युवा सम्मेलन का आयोजन

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लाडनूं।

दक्षिणांचल स्तरीय युवा सम्मेलन का आयोजन

अखिल भारतीय तेरापंथ युवक परिषद के तत्वावधान में 29-30 अप्रैल-01 मई 2026 को जैन विश्व भारती, लाडनूं में त्रिदिवसीय ‘दक्षिणांचल स्तरीय युवा सम्मेलन’ परम पूज्य आचार्यश्री महाश्रमणजी के पावन सान्निध्य में आयोजित हुआ। अभातेयुप के राष्ट्रीय अध्यक्ष पवन मांडोत की अध्यक्षता में आयोजित इस सम्मेलन में दक्षिण भारत की 15 शाखा परिषदों के लगभग 100 युवाओं ने भाग लिया। इस अवसर पर राजस्थान विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की और ‘नये भारत के निर्माण में युवाओं की भूमिका’ विषय पर उपस्थित युवकों को उद्बोधन प्रदान किया।
सम्मेलन का शुभारंभ मुनि सुमतिकुमारजी द्वारा नमस्कार महामंत्र के उच्चारण के साथ प्रारंभ हुआ, जिसके बाद उद्घाटन सत्र में विजय गीत और श्रावक निष्ठा पत्र का वाचन किया गया। मुनि सुमतिकुमारजी ने सम्यक्त्व को जीवन का अनमोल हीरा बताते हुए कहा कि यह हर जीव को प्राप्त नहीं होता। उन्होंने सम्यक्त्व के पांच लक्षणों शम-समता, संवेग-वैराग्य, निर्वेद-मोक्ष की अभिलाषा, अनुकंपा-दया और आस्तिक्य-आस्था का विस्तृत विवेचन किया। मुनि अर्हतकुमारजी ने कहा कि संघ बलिदान मांगता है, इसलिए उन्होंने युवाओं को 24 घंटे में से कम से कम 1 घंटा संघ प्रभावना के कार्यों के लिए निकालने का संकल्प दिलाया। मुनि नयकुमारजी ने योगक्षेम की महत्ता बताते हुए युवा शक्ति को धर्मसंघ की रीढ़ कहा और युवकों को आध्यात्मिक और सामाजिक क्षेत्र में नई ऊंचाइयों को छूने का आह्वान किया।
मुनि देवार्यकुमारजी ने तेरापंथ के गौरवशाली इतिहास पर प्रकाश डालते हुए युवाओं को ऊर्जा के सही दिशा में उपयोग की प्रेरणा दी। उन्होंने स्पष्ट किया कि विचारों से शब्द, शब्दों से वाणी और वाणी से क्रिया व भाग्य का निर्माण होता है।
मुनि भरतकुमारजी ने अंक विज्ञान के माध्यम से मानवीय जीवन और ग्रहों पर प्रभाव को रोचक ढंग से समझाया। मुनि सत्य कुमार जी ने 'भिक्षु दर्शन : जीवन दर्पण' विषय पर अपने विचार रखते हुए युवा शक्ति को भिक्षु दर्शन को सरल शब्दों में समझाया तथा युवकों को मार्ग से भटकने से सावधान किया।
मुनि जयदीपकुमारजी ने युवाओं को Realise, Compromise & Sacrifice के साथ I can, I want, I will का सूत्र दिया। मुनि नम्रकुमारजी ने सुमधुर गीतिका के माध्यम से संघ की महिमा का गुणगान किया।
अभातेयुप अध्यक्ष पवन मांडोत ने अपने संबोधन में संगठन की मजबूती और संस्कारों के प्रति युवाओं की जिम्मेदारी को रेखांकित किया। सहमंत्री प्रथम पवन नौलखा ने रोचक गतिविधि से संभागीगण को अपनी विशेषता पहचानने और उसेे बढ़ाने का मार्ग बताया। अध्यक्ष महोदय के नेतृत्व और प्रबंध मंडल की गरिमामयी उपस्थिति में यह सम्मेलन आध्यात्मिक ऊर्जा, सकारात्मक सोच और संघ के प्रति अटूट निष्ठा के संकल्प के साथ सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। सम्मेलन को सफल बनाने में अभातेयुप संपूर्ण प्रबंध मंडल एवं विशेष रूप से सहमंत्री द्वितीय अंकुर लूनिया, संगठन मंत्री रोहित कोठारी, दक्षिणांचल स्तरीय युवा सम्मेलन के संयोजक आशीष दक, सहसंयोजक सोनू डागा, मनीष पटावरी, अमित दक आदि का निष्ठापूर्ण श्रम एवं सहयोग रहा।