आचार्यश्री महाप्रज्ञजी के 17वें महाप्रयाण दिवस पर विविध कार्यक्रम

संस्थाएं

पूर्वांचल कोलकाता

आचार्यश्री महाप्रज्ञजी के 17वें महाप्रयाण दिवस पर विविध कार्यक्रम

युगप्रधान आचार्य श्री महाश्रमण जी के सुशिष्य मुनि जिनेशकुमारजी ठाणा-3 के सान्निध्य में युगप्रधान आचार्य श्री महाप्रज्ञ जी का 17 वां महाप्रयाण दिवस कार्यक्रम का आयोजन जैन श्वेताम्बर तेरापंथी सभा (कलकत्ता-पूर्वांचल) ट्रस्ट द्वारा शकुंतलादेवी तोदि भवन में आयोजित किया गया। इस अवसर पर उद्‌बोधन प्रदान करते हुए मुनि श्री जिनेश कुमार जी ने कहा - भारतीय ऋषि परंपरा के उज्ज्वल नक्षत्र थे-आचार्य श्री महाप्रज्ञ। वे बहु आयामी व्यक्तित्व के धनी थे। वे जैन न्याय के राधाकृष्ण थे। उनकी प्रज्ञा को देखकर भद्रबाहु एवं हरिभद्र जीवंत हो उठते थे । उनकी बुद्धि स्थिर, चिन्तन निर्मल एवं पवित्र थी। उनमें बुद्ध जैसी करुणा, ईसा जैसा प्रेम व महावीर जैसा ध्यान था। आचार्य श्री कालूगणी के अनेक जनमों की फलश्रुति है। आचार्य श्री महाप्रज्ञ वे आचार्य श्री तुलसी के विचारों के भाष्यकार थे। वे आगम की भाषा में महाप्रज्ञ थे तो गीता की भाषा में स्थितप्रज्ञ थे। उनका जन्म खुले आकाश में हुआ उसी प्रकार उनका चिंतन व्यापक एवं विशाल था। प्रेक्षाध्यान जीवन विज्ञान, अहिंसा यात्रा आदि अवदानो से उन्होंने मानव जाति को उपकृत किया। आगम संपादन व सैकड़ों पुस्तकों का लेखन उनकी विशिष्ट प्रतिभा का परिचायक है। उनका जीवन अनेक विशेषताओं का का समवाय था । वे सहज, सरल, विनम्र व सादगी पूर्ण प्रकृति के धनी थे। उनकी गुरुनिष्ठा, संघ निष्ठा, सिद्धान्त निष्ठा, आगम निष्ठा, अनुशासन निष्ठा अद्‌भुत थी। वे आचार्य तुलसी के सक्षम पट्टधर थे। आज आचार्य श्री महाप्रज्ञ जी के 17 वां महाप्रयाण दिवस पर श्रद्धायुक्त नमन । इस अवसर पर मुनि परमानंदजी ने कहा महाप्रज्ञ महान व्यक्तित्व के धनी थे। इस अवसर पर मुनि कुणाल कुमार जी ने सुमधुर गीत प्रस्तुत किया। इस अवसर पर उपासक प्राध्यापक डालिमन्चंद नौलखा, कलकत्ता सभा के अध्यक्ष अजय भंसाली, पूर्वांचल सभा के अध्यक्ष संजय सिंधी, तेरापंथ युवक परिषद के अध्यक्ष राजीव बोथरा, तेरापंथ महिला मंडल, पूर्वांचल की उपाध्यक्ष वनिता बरमेचा ,तेरापंथ प्रोफेशनल फोरम पूर्वांचल की उपाध्यक्ष चंदा बैद ने अपने विचारों के माध्यम से भावांजलि अर्पित की।