आचार्यश्री महाप्रज्ञजी के 17वें महाप्रयाण दिवस पर विविध कार्यक्रम

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आचार्यश्री महाप्रज्ञजी के 17वें महाप्रयाण दिवस पर विविध कार्यक्रम

तेरापंथ धर्मसंघ के 10वें अनुशास्ता महान जैनाचार्य प्रेक्षा प्रणेता आचार्य श्री महाप्रज्ञ का 17वां महाप्रयाण दिवस जैन श्वेतांबर तेरापंथी सभा, उधना के तत्वावधान में तेरापंथ भवन उधना में आचार्य श्री महाश्रमणजी के सुशिष्य मुनि डॉ. मदन कुमारजी के सान्निध्य में मनाया गया। इस अवसर पर उपस्थित भाविक भक्तजनों को संबोधित करते हुए मुनि डॉ. मदन कुमारजी ने कहा — आचार्य श्री महाप्रज्ञ एक विरल महापुरुष थे। वे जागृत प्रज्ञा के धनी थे। वे महाज्ञानी थे। जैन आगमों के साथ-साथ विश्व के सभी धर्मों का उन्होंने गहन अध्ययन किया था। वे प्रेक्षाध्यान के प्रवर्तक थे। ज्ञान और ध्यान की अलौकिक संपदा के धारक आचार्य महाप्रज्ञ दिव्य विभूति थे। आचार्य श्री तुलसी के निर्देशन में विशाल आगम ग्रंथों का उन्होंने संपादन किया। वे कुशल वक्ता थे, अद्भुत लेखक एवं आशुकवि थे। संस्कृत, प्राकृत एवं हिंदी तीनों भाषाओं में धाराप्रवाह प्रवचन देते थे। उनके एक प्रवचन से आदमी की दिशा और दशा बदल जाती थी। ऐसे महान आचार्य का उपलब्ध होना अध्यात्म जगत् का सौभाग्य था। भगवान महावीर के दर्शन को उन्होंने बड़ी सरल भाषा में जनता के समक्ष रखा। ऐसे महापुरुष जगत में बार-बार पैदा नहीं होते। 300 से भी अधिक पुस्तकों के लेखक आचार्य महाप्रज्ञजी का साहित्य वर्तमान विश्व में जो युद्ध का दावानल जल रहा है, उसमें शांति का संवाहक बन सकता है।
आप भी अपनी प्रज्ञा जागृत करने के लिए आचार्य श्री महाप्रज्ञजी का साहित्य अवश्य पढ़ें। मुनि संयम कुमारजी एवं कल्प कुमारजी ने आचार्य श्री महाप्रज्ञजी के जीवन के विविध प्रसंगों पर विस्तृत प्रकाश डाला। उधना भजन मंडली ने मंगलाचरण किया। सभाध्यक्ष निर्मल चपलोत ने स्वागत वक्तव्य दिया। अणुव्रत विश्व भारती के अणुव्रत परीक्षा प्रकल्प के राष्ट्रीय प्रभारी अर्जुन मेड़तवाल, महिला मंडल अध्यक्षा महिमा चोरड़िया, प्रेमलता बुच्चा आदि ने अपने भावों को प्रस्तुति दी। कार्यक्रम का कुशल संचालन तेरापंथी सभा उधना के मंत्री मुकेश बाबेल ने किया।