युगप्रधान आचार्य श्री महाश्रमण जी के 65वें जन्मोत्सव, 17वें पट्टोत्सव एवं 53वें दीक्षा दिवस पर विभिन्न कार्यक्रम

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पांडेसरा

युगप्रधान आचार्य श्री महाश्रमण जी के 65वें जन्मोत्सव, 17वें पट्टोत्सव एवं 53वें दीक्षा दिवस पर विभिन्न कार्यक्रम

आचार्य श्री महाश्रमणजी की विदुषी सुशिष्या डॉ. साध्वी परमयशाजी के सान्निध्य में 'आचार्य श्री महाश्रमणजी का 65वां जन्मोत्सव एवं 17वां पट्टोत्सव के कार्यक्रम का समायोजन हुआ। डॉ. साध्वी परमयशाजी ने अपने उद्बोधन में कहा कि— 'कोई दौलत पर नाज करते हैं, कोई शोहरत पर नाज करते हैं, हमें मिले महान गुरु आचार्य श्री महाश्रमणजी, हम अपनी किस्मत पर नाज करते हैं।' आचार्य श्री महाश्रमणजी एक महान प्रवचनकार हैं, साहित्यकार हैं, आगम संपादनकार हैं, रचनाकार हैं, सृजनहार हैं। समुद्र में डुबकी लगाने वाला शायद खाली हाथ रह जाए पर इस महामनस्वी के द्वार पर आने वाला खाली हाथ नहीं जाता। आकाश में ऊंचाई है पर गहराई नहीं; समुद्र में गहराई है पर ऊंचाई नहीं; सूर्य में तेजस्विता है पर शीतलता नहीं; चन्द्रमा में शीतलता है पर तेजस्विता नहीं; परंतु आचार्य श्री महाश्रमणजी में हम इन सबका संगम देख सकते हैं। 'महामनस्वी नतमस्तक हम शुभ दिन आज बढ़ाते हैं, हासिल हो नित नई सफलता यही भावना भाते हैं।' तेरापंथ महिला मंडल ने 'स्वर्णिम सूरज हरसाए रे, महाश्रमण दरबार' गीत का सुमधुर संगान किया। जन्मोत्सव एवं पट्टोत्सव के अवसर पर सुश्री विश्वा कावड़िया, उत्तम सोनी, मुकेश बाबेल, दीप्ति डांगी आदि सभी ने अपने आराध्य के प्रति भावों की अभिव्यक्ति दी। साध्वी कुमुद प्रभा जी ने ग्यारहवें अनुशास्ता के अनुत्तर गुणों का उल्लेख किया और अपनी स्वरचित गीतिका 'त्रिगुप्ति के महादेबता वंदन बारम्बार'का संगान किया। साध्वी मुक्ताप्रभजी ने अपनी स्वरचित कविता की अभिव्यक्ति दी। कार्यक्रम में ज्ञानशाला के बच्चों ने एक सुंदर, 'The Best, The Beautiful Act'प्रस्तुत किया। संघ गान के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।साध्वी विनम्रयशाजी ने कार्यक्रम का कुशल संचालन किया।