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युगप्रधान आचार्य श्री महाश्रमण जी के 65वें जन्मोत्सव, 17वें पट्टोत्सव एवं 53वें दीक्षा दिवस पर विभिन्न कार्यक्रम
जैन सेवा संघ रामकोट, हैदराबाद के विशाल हॉल में आचार्य श्री महाश्रमणजी के 65वें जन्मदिवस और 17वें पदाभिषेक दिवस का भव्य आयोजन 'महाश्रमणोत्सव' के रूप में आचार्य श्री महाश्रमण जी के सुशिष्य मुनि दीप कुमार जी ठाणा-२ के सानिध्य में तेरापंथी सभा- सिंकदराबाद द्वारा आयोजित किया गया। मुनि दीप कुमारजी ने कहा -आचार्य श्री महाश्रमण जी स्व और पर कल्याण में रत है। स्वयं की आत्मा के कल्याण की उत्कृष्ट साधना कर रहे हैं तो दूसरों को भी आत्म कल्याण की दिशा में जीने का भारी प्रयत्न करा रहे हैं। आचार्य श्री जहां धर्मसंध के शासक है तो साधक भी हैं। प्रतिकूल स्थितियों में भी शासना करते हुए, साधना की ऊँचाई पर स्थित है। वे कीर्तिमान पुरुष है। यात्राओं के अद्भुत कीर्तिमान बनाए है। आचार्य श्री आगम संगायक है। आगम वाणी के साथ प्रवचन कराते हैं, आगमों का संपादन कराते हैं, साधु-साध्वियों को आगम स्वाध्याय की पावन प्रेरणा दिराते हैं। मुनिश्री ने आगे कहा- हम सौभाग्यशाली है कि ऐसे धर्मगुरु हमें प्राप्त हुए हैं। इस अवसर पर संकल्प करते है कि उनका जो आदेश निर्देश होगा उस दिशा में हमारे कदम बढ़ेंगे। मुनि श्री काव्य कुमार जी ने संचालन करते हुए कहा - आचार्यश्री अनंत शक्ति के अक्षय स्रोत है । वे संघ के पावर हाउस है एवं पूरे संघ को पावर सप्लाई करते हैं । आचार्य प्रवर का जीवन अनेक विलक्षण विशेषताओं का पुंज है। कार्यक्रम में मंगलाचरण हैदराबाद कन्यामंडल की कन्याओं ने किया। तेरापंथी सभा सिंकदाबाद के अध्यक्ष सुशील संचेती, ते. यु.प. अध्यक्ष राहुल गोलछा , ते.म.म. मंत्री निशाजी सेठिया, टी.पी..फ मंत्री अणुव्रत सुराणा, श्री जैन सेवा सेवा संघ के कोषाध्यक्ष सुरेश सुराणा आदि ने विचारों की अभिव्यक्ति दी। तेरापंथ किशोर मंडल द्वारा गीत की प्रस्तुति दी गई । आभार ज्ञापन सभा मंत्री हेमंत संचेती द्वारा किया गया। समापन, संघ- गान के साथ हुआ। कार्यक्रम का कुशल संचालन मुनि काव्य कुमारजी ने किया। सभा द्वारा श्री जैन सेवा संघ के पदाधिकारियों का सम्मान भी किया गया।