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युगप्रधान आचार्य श्री महाश्रमण जी के 65वें जन्मोत्सव, 17वें पट्टोत्सव एवं 53वें दीक्षा दिवस पर विभिन्न कार्यक्रम
मुनि तत्त्व रुचि जी 'तरूण' ने महाप्रज्ञ इंटरनेशनल स्कूल में संबोधि सभागार में आयोजित मुख्य कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए कहा - संत परंपरा के आदर्श हैं - संत आचार्य श्री महाश्रमण। भारतीय परंपरा में ऋषियों, मुनियों और संतों-महंतों की महान श्रेणी में संत आचार्य श्री महाश्रमण जी का नाम श्रद्धा से लिया जाता है। वे देश-विदेश में पदयात्रा करते हुए लाखों-लाखों लोगों को नशामुक्ति का संकल्प करा चुके हैं। वे अहिंसा यात्रा के माध्यम से मानवीय मूल्यों की स्थापना कर रहे हैं। जन-जन में नैतिकता, प्रामाणिकता के प्रति निष्ठा पैदा कर रहे हैं। समाज में साम्प्रदायिक सौहार्द, मानवीय एकता और अहिंसा की भावना को पुष्ट कर रहे हैं। वे स्वयं संयम व शांति की साधना करते हुए दुनिया को शांति का संदेश दे रहे हैं। ऐसे विश्व वंदनीय संत के संयम दिवस पर विश्व मानव अभिवादन एवं अभिनंदन करता है। मुनि श्री संभव कुमार जी ने कहा - आचार्य श्री महाश्रमण करुणा की गंगोत्री हैं। जिनका सम्पूर्ण जीवन परोपकार और मानवता को समर्पित है। मुनि जी ने बताया कि आचार्य महाश्रमण जी श्रीमद् भगवद् गीता के ज्ञाता-व्याख्याता ही नहीं बल्कि उनके जीवन व्यवहार में उसका साक्षात्कार भी होता है। वे निष्काम योगी और स्थित प्रज्ञता के प्रतिरूप हैं। आचार, विचार और व्यवहार की एकता के प्रतीक जन-जन की आस्था के केन्द्र आचार्य श्री महाश्रमण जी को शत-शत नमन करते हैं। कार्यक्रम में जैन श्वेताम्बर तेरापंथी सभा से मास्टर रतन जैन व महिला समाज की ओर से तेरापंथ महिला मंडल (सी-स्कीम) अध्यक्षा कनक आंचलिया ने गीत से अपने श्रद्धा भावों की अभिव्यक्ति दी। कार्यक्रम का प्रारम्भ तीर्थंकर पदम् प्रभु की स्तुति से हुआ। इस अवसर पर तेरापंथ संविधान का पाक्षिक वाचन भी किया गया।