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युगप्रधान आचार्य श्री महाश्रमण जी के 65वें जन्मोत्सव, 17वें पट्टोत्सव एवं 53वें दीक्षा दिवस पर विभिन्न कार्यक्रम
तेरापंथ भवन में शासनश्री साध्वी मानकुमारी जी के सान्निध्य में महातपस्वी युग प्रधान आचार्यश्री महाश्रमण जी का जन्म व पदाभिषेक दिवस मनाया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ साध्वी कमलयशा जी व साध्वी चैत्यप्रभा जी के मंगलाचरण से हुआ। इस अवसर पर शासनश्री साध्वी मानकुमारी जी ने धर्म सभा को संबोधित करते हुए कहा - आचार्यश्री महाश्रमण जी एक ऐसे महापुरुष हैं, संत पुरुष हैं जिनका जीवन जन-जन के लिए एक प्रेरणा है। करुणा, सरलता, सहजता, निस्पृहता व विनम्रता आदि ऐसी विशेषताओं के महापुंज हैं आचार्यश्री महाश्रमण जी। जिनके व्यक्तित्व से केवल तेरापंथ संघ ही लाभान्वित नहीं हो रहा है बल्कि जैन-जैनेतर समाज भी युग प्रधान आचार्यश्री के प्रति नतमस्तक है। योगक्षेम वर्ष लाडनूं का वह भव्य नजारा आचार्यश्री महाश्रमण जी की अनुपम देन है जो संघ के साधु साध्वियों के लिए ज्ञान, दर्शन, चारित्र के संवर्धन का आयाम बन रहा है। इस अवसर पर साध्वी कुशालप्रभा जी, साध्वी कीर्तिरेखा जी, साध्वी स्नेहाप्रभा जी, तेरापंथ महिला मंडल, श्रावक चुन्नीलाल घोषल, मंजू देवी बाफना, मोनिका बैद आदि ने अपने आराध्य की अभ्यर्थना की। कार्यक्रम का कुशल संयोजन साध्वी इंदुयशा जी ने किया। कार्यक्रम में तेरापंथ युवक परिषद् के अध्यक्ष मुकेश श्रीमाल व मंत्री रजत बैद ने 'सम्यक दर्शन कार्यशाला' में उत्तीर्ण परीक्षार्थियों को प्रशस्ति पत्र वितरित किए।