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युगप्रधान आचार्य श्री महाश्रमण जी के 65वें जन्मोत्सव, 17वें पट्टोत्सव एवं 53वें दीक्षा दिवस पर विभिन्न कार्यक्रम
जैन श्वेताम्बर तेरापंथी सभा,गंगाशहर के तत्वावधान में आचार्य श्री महाश्रमण जी का 65 वां जन्मदिन आज बोथरा भवन में मुनि अमृत कुमार जी के सान्निध्य में मनाया गया। इस अवसर पर बोलते हुए मुनि अमृत कुमार जी ने कहा आचार्य श्री महाश्रमण जी का जन्म चुरू जिले के सरदारशहर में 13 मई, 1962 को हुआ। बालक मोहन से मुनि मुदित कुमार, फिर मुनि मुदित कुमार से आचार्य श्री महाश्रमण बनना आपके पुरुषार्थ का प्रतिबिम्ब है। अहिंसा,सत्य,संयम और अनुशासन के यथार्थ प्रतीक है युग प्रधान आचार्य श्री महाश्रमण जी। आचार्य श्री महाश्रमण जी का प्रत्येक कार्य समयबद्ध होता है। इतने बड़े संघ का सुव्यवस्थित संचालन करना और अपनी साध्वाचार में कभी कहीं विराम नहीं लगने देना बहुत बड़ी बात है।
आचार्य श्री महाश्रमण जी का जीवन परमार्थ को समर्पित है। लाखों लाखों लोगों को सद्भावना, नैतिकता, नशामुक्ति की प्रतिज्ञा करवाकर राष्ट्र की महान सेवा की है। कार्यक्रम में मुनि प्रबोध कुमार जी ने कहा कि आचार्य श्री महाश्रमण जी प्रकृति से सरल,भावो से निर्मल हृदय से पवित्र आत्मा है। आप लोक कल्याण के लिए 65 हजार किलोमीटर से भी अधिक की यात्रा की है।
आचार्य महाश्रमण जी तेरापंथ धर्म संघ के प्रथम आचार्य है जिन्होंने पदयात्रा के माध्यम से नेपाल व भुटान में भी धर्म की गंगा बहाई है। मुनि उपशम कुमार जी ने भी अपने विचार व्यक्त किए।