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युगप्रधान आचार्य श्री महाश्रमण जी के 65वें जन्मोत्सव, 17वें पट्टोत्सव एवं 53वें दीक्षा दिवस पर विभिन्न कार्यक्रम
युगप्रधान आचार्य श्री महाश्रमण जी का 17 वाँ पट्टोत्सव सुशिष्य मुनि जिनेश कुमार जी ठाणा-3 के सानिध्य में साउथ कलकत्ता श्री जैन श्वेताम्बर तेरापंथी सभा द्वारा तेरापंथ भवन में हर्षोल्लास पूर्वक आयोजित किया गया । इस अवसर पर अच्छी संख्या में श्रद्धालुगण उपस्थित रहे। इस अवसर पर उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए मुनि जिनेश कुमार जी ने कहा - विलक्षण व नैसर्गिक प्रतिभा के धनी है - आचार्य श्री महाश्रमण। वे पापभीरू,आत्मार्थी, सहज, सरल, शांत व आचार सम्पन्न है। वे तीर्थंकर के प्रतिनिधि व छतीस गुणों के धारक हैं। धर्मसंध में आचार्य का स्थान सर्वोच्च होता है। वे न्यायविद व तटस्थ होते है। आचार्य की आठ गणि संपदा होती है यथा - आचार, श्रुत, शरीर, वचन, वाचना, मति, प्रयोग और संग्रह। युगप्रधान आचार्य श्री महाश्रमण जी के चिंतन में गांभीर्य, दृष्टि में प्रसन्नता, व्यवहार में कुशलता है। वे संघ हितैषी हैं। उन्होंने पदयात्रा के जरिये जन-जन को अहिंसा, शांति व सदभावना का सन्देश प्रदान किया है। वे दो युगप्रधान आचार्यों (आचार्य श्री तुलसी व आचार्य श्री महाप्रज्ञ जी) द्वारा निर्मित मूल्यवान कृति हैं। तेरापंथ धर्मसंघ में पट्टोत्सव का विशेष महत्व है। आज हम आचार्य श्री महाश्रमण जी का 17 वाँ पट्टोत्सव मना रहे हैं। आचार्य श्री युगों-युगों तक धर्मशासन व मानव जाति की सेवा कराते रहें यही हम मंगल कामना करते हैं। मुनि परमानंद ने कहा- आचार्य श्री का पट्टोत्सव मनाकर हम सभी अपने आपको गौरवान्वित महसूस कर रहें हैं। मुनि कुणाल कुमार जी ने सुमधुर गीत का संगान किया। स्वागत भाषण साउथ कलकता श्री जैन श्वेताम्बर तेरापंथी सभा के अध्यक्ष बिनोद कुमार चोरड़िया ने दिया। इस अवसर पर महासभा के पूर्व अध्यक्ष श्री चैनरूप चंडालिया, तेरापंथ प्रोफेशनल फोरम कलकता साउथ के अध्यक्ष नरेन्द्र सिरोहिया, तेरापंथ महिला मंडल साउथ कोलकाता की अध्यक्ष बिन्दु डागा, तेरापंथ युवक परिषद साउथ कलकत्ता के पूर्व अध्यक्ष मोहित बैद ने अपने विचार व्यक्त किये। अभ्यर्थना गीतों की प्रस्तुति के क्रम में तेरापंथी सभा, तेरापंथ युवक परिषद व तेरापंथ प्रोफेशनल फोरम के पदाधिकारियों व सदस्यों ने सुमधुर गीतों की प्रस्तुति दी। तेरापंथ महिला मंडल साउथ कलकत्ता द्वारा ''गाथा शिखर पुरुष की ' कार्यक्रम की प्रस्तुति दी गई। आभार ज्ञापन सभा के मंत्री कमल कोचर ने किया। कार्यक्रम का संचालन मुनि परमानंद ने किया।