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वीरता को हम करें प्रणाम
वीरता को हम करें प्रणाम,
शासनश्री चंदनबालाजी पहुंचे अपने मुकाम (धाम)।
गुरु तुलसी के करकमलों से संयम जीवन धारा,
पंच दशक गुरुकुल में रहकर जीवन खूब संवारा,
यौवन में संयम लेकर के, खूब किया है काम॥
तीन-तीन आचार्यों का शुभ वरदहस्त है पाया,
प्रथम साध्वी प्रमुखा की मिली सुखद शीतल छाया,
नंदनवन सम भिक्षु गण में चमकाया शुभ नाम॥
सहनशीलता, व्यवहार कुशलता, ऋजुता मृदुता भारी,
शासनसेवा, गुरुदृष्टि से सींची जीवन क्यारी,
भक्ति देखी तेरी निराली, मीरा ज्यूं घनश्याम॥
मौत महोत्सव बनी आपकी, अन्तिम कला सिखाई,
प्राण जाये पर प्रण नहीं जाये, खुद निष्ठा दिखलाई,
आधि व्याधि और उपाधि में, समता अविराम॥
रंगाई सिलाई हस्तकला में अव्वल नंबर,
संस्कारों के बूंदों से भरा संघ समन्दर,
फूर्ति तन पर रही सदा, आलस का नहीं है काम॥
भगिनी द्वय का अद्भुत जोड़ा इक झटके में तोड़ा,
तन कपड़ा बनकर के राजश्री ने अन्तस जोड़ा
प्रभाव, समीक्षा सिद्धि ने साता पहुंचाई प्रकाश ॥
(अहमदाबाद के श्रावकों ने साता पहुंचाई अविराम)
लय - धर्म की लौ जगाएं