रचनाएं
प्रज्ञा निलयं में खुशियों का सागर लहराया
प्रज्ञा निलयं में खुशियों का सागर लहराया।
नई बहारें कुदरत का कण-कण है मुस्काया ॥ १ ॥
उज्जवलतम आचार तुम्हारा प्रेरक बनता है क्षण-क्षण
सौम्यमूर्ति व्यवहार समुन्नत बात-बात में अपनापन
युग अनुरूप प्रशिक्षण प्रवचन सबके मन भाया ॥ २ ॥
स्वाध्यायी बहुश्रुत समयज्ञा सतीशेखरा लो वन्दन
आज्ञा मर्यादा गुरुनिष्ठा तप जप से भावित चेतन
उच्च साधना के प्रयोग है कल्पवृक्ष छाया ॥ ३ ॥
अभिनन्दन की पावन बेला आस्था थाल सजा लाए
रहो निरामय बनो शतायु चयन दिवस पर हम गाएं
चन्देरी, मोदी परिकर यश परचम फहराया ॥४।।
तर्ज : अणुव्रत है सोया