निर्मलता, गंभीरता और तेजस्विता के मूर्त रूप हैं आचार्य श्री महाश्रमण

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निर्मलता, गंभीरता और तेजस्विता के मूर्त रूप हैं आचार्य श्री महाश्रमण

मुनि मदन कुमारजी ने कहा कि ज्योतिपुंज आचार्य श्री महाश्रमण निर्मलता, गंभीरता और तेजस्विता के मूर्त रूप हैं। उनमें चन्द्रमा जैसी निर्मलता, सागर जैसी गंभीरता और सूर्य जैसी तेजस्विता के एक साथ दर्शन किये जा सकते हैं। मुनि मदनकुमारजी आचार्य श्री महाश्रमण के 53 वें दीक्षा-दिवस कार्यक्रम में बोल रहे थे। मुनि ने कहा कि दीक्षा पुनर्जन्म है और अध्यात्म का उन्नयन है। दीक्षा अमरत्व की साधना है और व्रतों की आराधना है। मुनि मदन कुमारजी ने कहा कि महाश्रमणजी के जीवन में पुण्यवत्ता, पवित्रता और पुरुषार्थ का त्रिवेणी संगम है। वे एक अकिंचन महापुरुष हैं और अप्रमत्त साधक हैं। वे अपने दस पूर्वाचार्यों के प्रति अत्यंत कृतज्ञ हैं तथा जन जागरण का महान कार्य कर रहे हैं। कार्यक्रम में मुनि संयमकुमारजी और मुनि कल्प कुमारजी ने उद्गार व्यक्त किये तथा तेरापंथ युवक परिषद के अध्यक्ष नमन मेड़तवाल ने महाश्रमणोऽस्तु मंगलम् के लिये आह्वान किया।