रचनाएं
महायशस्वी महामनस्वी क्रमशः पाये नाथ
भिक्षु शासन का सुयश, सुनते हैं दिन-रात
महायशस्वी महामनस्वी क्रमशः पाये नाथ
क्रमशः पाये नाथ संघ की रक्षा करते
एक एक सदस्य में गहरे संस्कार हैं भरते
इसी लिए ही भिक्षु गण में प्रतिदिन स्वर्ण प्रभात
भिक्षु शासन का सुयश सुनते हैं दिन-रात ॥१॥
महाश्रमण का दिल दिमाग है उर्वर और विशाल
नये नये आयाम चलाकर गण को किया निहाल
गण को किया निहाल मुख्य मुनि चयन निराला
एक एक चिंतन गुरुवर का लगता आला
जिनके दूरदर्शी चिंतन से हैं सारे खुशहाल
महाश्रमण का दिल दिमाग है उर्वर और विशाल ॥२॥
पूर्वांचल के असम प्रांत में वर पधारें गाम
जहाँ नियुक्ति की गुरुवर ने प्रकट हर्ष प्रकाम
प्रकट हर्ष प्रकाम सुयश चहुँदिशि में छाया
गुरु दृष्टि अमृत की वृष्टि जन-जन ने यह गाया
रोम-रोम में अभिनव खुशियाँ कहते लोग तमाम
पूर्वांचल के असम प्रांत में वर पधारें गाम ॥३॥
महावीर मुनि मुख्य मुनि हैं जन-जन के उद्गार
महाश्रमण गुरुवर का गण को यह अनुपम उपहार
यह अनुपम उपहार बड़ा ही उज्वल जीवन
प्रवचन और संगीत श्रवण कर सारे धन-धन
है आचार विचार आपका निर्मल गंगाधार
महावीर मुनि मुख्य मुनि हैं जन-जन के उद्गार ॥४॥
ज्ञान ध्यान स्वाध्याय आपका चलता है निर्बाध
शुद्ध सेवा का मिलता रहता नित प्रसाद अविवाद
नित प्रसाद अविवाद खूब गंभीर धीर हैं
महाश्रमण की मुख्य कृति मुनि महावीर हैं
जागृत जीवन देखना हर क्षण किंचित नहीं प्रमाद
ज्ञान ध्यान स्वाध्याय आपका चलता है निर्बाध॥ ५॥