गुरुवाणी/ केन्द्र
गुरु की आज्ञा में रहना ही वास्तविक गुरुकुलवास, मीठी वाणी है वशीकरण मंत्र : आचार्यश्री महाश्रमण
जैन विश्व भारती के पावन परिसर में ‘योगक्षेम वर्ष’ के अंतर्गत आयोजित आध्यात्मिक प्रकल्प जन-जन में नई ऊर्जा का संचार कर रहे हैं। इसी कड़ी में आज तेरापंथ धर्मसंघ के एकादशमाधिशास्ता आचार्य श्री महाश्रमण जी ने 'प्रियंकर और प्रियवादी बनें' विषय पर चतुर्विध धर्मसंघ को संबोधित करते हुए शिक्षा प्राप्ति की अनिवार्य अर्हताओं पर प्रकाश डाला। गुरुकुलवास : आज्ञा और सन्निधि का संगम : शिक्षा कौन प्राप्त कर सकता है? इस प्रश्न का समाधान करते हुए आचार्य प्रवर ने फरमाया कि जो 'गुरुकुल' में वास करता है, वही वास्तविक ज्ञान का अधिकारी है। गुरु सन्निधि में रहने का अर्थ केवल शारीरिक निकटता नहीं, बल्कि गुरु की आज्ञा के प्रति पूर्ण समर्पण है। जो शिष्य गुरु की आज्ञा में जागरूक नहीं, वह निकट रहकर भी गुरुकुलवास से बाहर है। गुरुकुलवास में रहने से व्याख्यान और क्षेत्र-संभाल जैसी बाह्य जिम्मेदारियों से मुक्ति रहती है, जिससे ज्ञानार्जन, चरित्र निर्मलता और दर्शन की स्थिरता हेतु पर्याप्त समय और विशेषज्ञों का मार्गदर्शन सुलभ हो जाता है।
व्यवहार कौशल : प्रियंकर और प्रियवादी गुण : आचार्यश्री ने उत्तराध्ययन सूत्र के आलोक में फरमाया कि जो प्रिय व्यवहार करने वाला (प्रियंकर) और मधुर बोलने वाला (प्रियवादी) है, वही शिक्षा का पात्र है। गुरुदेव ने व्यावहारिक शिष्टाचार के सूत्र देते हुए फरमाया: सम्मानजनक शब्दावली : बड़ों के प्रति 'बोलो' के स्थान पर 'फरमाओ' या 'कृपा कराई' जैसे गरिमापूर्ण शब्दों का प्रयोग आचरण को ऊंचाई देता है। मधुर भाषी : मीठा बोलना एक वशीकरण मंत्र है, जो सुख और सौहार्द उत्पन्न करता है। सत्य के साथ प्रियता का योग सदैव बना रहना चाहिए। विनय और वात्सल्य : छोटों का बड़ों के प्रति विनय और बड़ों का छोटों के प्रति वात्सल्यपूर्ण व्यवहार ही जैन आगमों का मूल व्यवहार कौशल है।
साधना और शांति का संदेश : आचार्य प्रवर ने आह्वान किया कि क्रोध का परित्याग कर अपनी बात शांति से रखने का प्रयास करना चाहिए। जीवन सदैव आध्यात्मिक मूल्यों और औचित्य से ओतप्रोत रहे, तभी शिक्षा की सार्थकता है। भावाभिव्यक्ति एवं संवाद प्रस्तुति: मंगल प्रवचन के उपरांत आचार्यश्री की अभिनंदना में साध्वी कुसुमप्रभा जी और साध्वी सम्यकप्रभा जी ने अपनी भावाभिव्यक्ति दी। साध्वी वृंद द्वारा प्रस्तुत सामूहिक संवाद ने सभा को आध्यात्मिक संदेश से भावविभोर कर दिया।