रचनाएं
तुलसी गुरु मुख कमल से-संयम व्रत स्वीकार
तुलसी गुरु मुख कमल से - संयम व्रत स्वीकार
मुनि प्रसन्न जी बन गये - तेरापथ अणगार ।।
सोहन मुनिवर साथ में - लंबा किया प्रवास
अध्ययन सेवा से किया - अपना खूब विकास ।।
मुनि संजय प्रकाश के - सगे भ्रात थे आप
चाचा मुनिवर धैर्य के - धर्म संघ में छाप ।।
महाश्रमण गुरुदेव की - आज्ञा के अनुसार
पहुँच गये मुनि द्वय कुशल - भीलवाड़ा मझार ।।
चलते फिरते कर लिया - भव-भव से कल्याण
करते हैं यह कामना - शीघ्र वरें शिवस्थान ।।