संस्थाएं
युगप्रधान आचार्य श्री महाश्रमण जी के 65वें जन्मोत्सव, 17वें पट्टोत्सव एवं 53वें दीक्षा दिवस पर विभिन्न कार्यक्रम
शासनश्री साध्वी कंचनप्रभाजी एवं साध्वी मंजुरेखाजी ठाणा ५ के सानिध्य में उत्साह के साथ दीक्षा दिवस मनाया गया। भक्ति प्रणत अभिवंदना के स्वरों में शासन श्री साध्वी कंचनप्रभाजी ने कहा- राजस्थान की पुण्य धरा सरदारशहर में जन्मे एवं सरदारशहर में मुनि श्री सुमेरमलजी स्वामी (मंत्री मुनि) के कर कमलों से मात्र 12 वर्ष की लघु वय में दीक्षित आज तेरापन्थ के एकादशम अधिशास्ता है। आज उनका ५३वां दीक्षा दिवस है। पूरा धर्म संघ अति उत्साह के साथ आनन्दित हैं। आगम वाणी बता रही है कि जिस मुनि में अनुशासन व विनय हो वह उन्नत शिखर पर आरोहण कर रहा है। जिसका प्रत्यक्ष साक्षात हो रहा है,महाश्रमण जी के जीवन में। शासन श्री साध्वी मंजुरेखाजी ने कहा तेरापंथ के आचार्यों का कितना महान चिन्तन व आशीर्वाद है कि आचार्य तुलसी व आचार्य महाप्रज्ञ ने मुनि मुदित को महाश्रमण पद पर विभूषित किया फिर युवाचार्य बनाया। ऐसा तब होता है जब उनकी गुणवत्ता सामने जाती है। उनकी श्रम निष्ठा तथा संघ निष्ठा, आचार निष्ठा उनके अपने व्यक्ति और कर्तृत्व की पहचान है। उन्होंने सम्पूर्ण भारत की यात्रा कर हजारों व्यक्तियों को नशामुक्त बनाया, तथा जीवन जीने की कला सिखाई। साध्वी उदित प्रभाजी, निर्भयप्रभाजी, चेलनाश्रीजी ने अभिवंदना की। साध्वी मंजु रेखाजी, उदित प्रभाजी, निर्भय प्रभाजी एवं चेलनाश्रीजीने सुमधुर गीत प्रस्तुत किया। सूरजमल दुगड़ ने प्रेरक एवं मधुर संस्मरण सुनाएँ । महेन्द्र तातेड ने आभार ज्ञापन किया।