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युगप्रधान आचार्य श्री महाश्रमण जी के 65वें जन्मोत्सव, 17वें पट्टोत्सव एवं 53वें दीक्षा दिवस पर विभिन्न कार्यक्रम
परम पूज्य युगप्रधान आचार्य श्री महाश्रमण जी की सुशिष्या साध्वी पुण्ययशा जी के सानिध्य हासन में आचार्य प्रवर का 53वाँ दीक्षा दिवस युवा दिवस के रूप में मनाया गया। साध्वी श्री ने मंगल उद्बोधन में कहा आचार्य श्री महाश्रमणजी मानवता के मसीहा, करूणा के कुबेर स्थित है। आप श्री का जीवन में आचार-विचार की ऊचाई है वही साधना की गहराई है। अनेक गुणों के द्वारा मणडित नेतृत्व व्यक्तित्व है . स्वयं कल्याण के साथ साथ आपका जीवन मानव कल्याण के लिए समर्पित है। आपकी कार्य समिति आदि समितियों के प्रति जागरूकता बेजोड़ है। लम्बी यात्राओं के द्वारा नव इतिहास का सृजन किया। दीक्षा के क्षेत्र में नव कीर्तिमान स्थापित किए. करुणामय जीवन में आवेश, आवेग का उपशात बनाया है। हम आज मंगल क्षणों में यही मंगल कामना करते है आप योग-युगों तक शासन साधना करे । साध्वी प्रमुख श्री विश्रुत विभाजी के चयन दिवस की मंगल कामना करते हुए आप चिरायु से, निरामय हो, शतायु हो. कार्यक्रम का मंगलाचरण साध्वी वर्षमान यशा जी ने गीत के माध्यम से किया। तेरापंथ युवक परिषद के अध्यक्ष नितेश सुराणा ने अपने भावों की प्रस्तुति दि. चतुर्दर्शी मे हाजरी का वाचन किया गया कार्यक्रम का संचालन साध्वी बोधिप्रभा जी ने किया।