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युगप्रधान आचार्य श्री महाश्रमण जी के 65वें जन्मोत्सव, 17वें पट्टोत्सव एवं 53वें दीक्षा दिवस पर विभिन्न कार्यक्रम
युगप्रधान आचार्यश्री महाश्रमण जी के विद्वान सुशिष्य डॉ मुनि पुलकित कुमारजी ठाणा 2 के मंगल सानिध्य में तेरापंथ सभा होसुर के तत्वावधान में आचार्य श्री महाश्रमण का 53 वां दीक्षा दिवस कार्यक्रम का आयोजन तेरापंथ सभा भवन में हुआ। इस अवसर पर मुनिश्री ने कहा संयम का सुख भाग्यशाली को ही मिलता है, व्यक्ति जितना असंयम से बचें बचने का प्रयास करना चाहिए तथा अपने भीतर संयम के भावों को बढ़ाते रहना चाहिए। मुनिश्री ने आगे कहा आचार्य महाश्रमण ने 12 वर्ष की उम्र में गुरुदेव तुलसी की आज्ञा से मंत्री मुनि सुमेरमल जी लाडनूं के कर कमलों से आज के दिन मुनि दीक्षा स्वीकार की थी ।आज 53 वां दीक्षा दिवस मनाया जा रहा है इससे हमें संयम की चेतना को जगाने की प्रेरणा लेनी चाहिए। मुनि श्री ने प्रेरणा देते हुए कहा प्रतिदिन किसी भी एक वस्तु का त्याग अवश्य करें। इस तरह अनावश्यक असंयम के पाप से बचा जा सकता है। आज के दिन श्रावक समाज 12 व्रत को धारण करने का संकल्प लें । मुनि आदित्य कुमार ने जय महाश्रमण गुरुराज भक्ति गीत प्रस्तुत किया। कार्यक्रम का शुभारंभ अर्हत वंदना से हुआ। महाश्रमण अष्टकम का संगान शांतिबाई जैन, स्वीटी बाबेल ने किया। महिला मंडल में स्वागत गीत प्रस्तुत किया। सुनैना नाहर ने विचार प्रस्तुत किया। मंगल बाफना ने स्वागत भाषण किया। ज्ञानशाला की तरफ से दक्ष सेठिया, गर्व नाहर, गरिमा हर्ष पीपाड़ा, वर्धन बाफना, धृति बाफना, झलक बाबेल ने शानदार प्रस्तुति दी। नम्रता सेठिया एवं निकिता बाफना ने कविता पाठ किया। कार्यक्रम का संचालन विनय सेठिया ने किया।