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देते आज बधाई
देते आज बधाई।
गुरु महाश्रमण की पूर्ण कृति साध्वीवर्या कहलाई।
लघुवय में साध्वीवर्या ने अनुपम ख्यात बनाई ॥ ध्रुव ॥
सोहनलालजी अनुदेवी घर जन्म अमोलक पाया
माता के उपवास सुता का तप में जन्म सुहाया
तपी तपाई भू पर आई सबको बड़ी सुहाई ॥ १ ॥
विश्रुत मुनि की सहोदरी की महिमा जग में छाई
मलय श्री जी की कनिष्ठा वरिष्ठ पद पर आई
उदित ख्यात दोनों सन्निधि की नातीली कहलाई ॥ २ ॥
महाप्रज्ञ गुरु की सन्निधी में समणी दीक्षा भाई
महाश्रमण ने गुरु आज्ञा से शुभ दीक्षा पचखाई
साध्वी दीक्षा महाश्रमण मुख कली कली विकसाई ॥ ३ ॥
दीक्षा के पश्चात आपको गुरुकुल वास मिला है
शासन माता का संरक्षण जीवन बाग खिला है
मुख्य नियोजिका जी की पल पल बनी रही परछाई ॥ ४ ॥
असम तेजपुर में गुरुवर ने अलंकरण बक्शाया
नुगरा में पदस्थ बनाकर गौरव खूब बढ़ाया
संबुद्धयशा अब साध्वीवर्या सुन कण कण हर्षाया
प्रमुखा प्रथम अपर नियोजिका तृतीय आप कहलाई ॥ ५ ॥
ज्ञान ध्यान स्वाध्याय आपका चलता रहे निरंतर
बने प्रेरणादायी जीवन सब हित बाह्याभ्यन्तर
बने चिरायु हों दीर्घायु प्रकटी है पुण्याई
सदा स्वस्थ मस्त रहें नित प्रकटी है पुण्याई ॥ ६ ॥
महाश्रमण की सूझ बूझ को सविनय शीश नमाते
चयन दिवस पर मिलजुल मुनिगण मंगल भाव सुनाते
गुरु दृष्टि अमृत की वृष्टि फर्क न राई पाई ॥ ७ ॥
तर्ज : संयममय जीवन हो