रचनाएं
शासन उपवन रा मंदार थांस्युं नन्दन वन गुलजार
शासन उपवन रा मंदार म्हाने वांछित फल दातार
शासन उपवन रा मंदार थांस्युं नन्दन वन गुलजार
गौरव शिखरं चढावां म्है मंगल शंख बजावां म्हे।। १ ।।
थारै दिल दरियै में इमरत लहरौवै दिन रात
प्राणी मात्र पर अनुकम्पा री करो सतत बरसात
देव कुंवर सो मुख मनहार नयन कमल है सदाबहार।। २ ।।
हिमगिरी सी उत्तुंग साधना अद्भुत समता भाव
तीर्थेश्वर सम कल्याणी वाणी रो गजब प्रभाव
पीकर शान्त सुधारस धार सारी दुनियां शुक्रगुजार।। ३ ।।
महातपस्वी पुरुषप्रतापी भास्कर सा द्युतिमान
यायावर बण तीन देश नै दिया तीन अवदान
तम में पसरयो प्रखर प्रकाश आयो पतझर में मधुमास।। ४ ।।
योगक्षेम वर्ष शुभ अवसर सभासुधर्मा खास
संघ सदन री च्यारूं कुंटा फैल्यो हर्षोल्लास
धरती अम्बर गुंजै आज युग-युग जीओ गण सरताज।। ५ ।।
तर्ज - नीला घोडा रा...